Adhure ishq ki puri dastan - 13 in Hindi Love Stories by Nirali Ahir books and stories PDF | अधूरे इश्क की पूरी दास्तान - 13

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान - 13

सुमित को बाहर जाता देख कोई कुछ नहीं बोल पाया सिर्फ उसे जाता देख रहे।

     सुमित ने एक छोटी गली के सामने कार रोकी।कार से उतरकर उस गली में चला गया,उस गली के पार एक शटर था जो बंद था।

    सुमित ने खटखटाया,अंदर से आवाज आई अभी दुकान बंद है कौन है?सुमित ने कहा अनुराग में हु,शटर आधा खुला ओर सुमित अंदर चला गया।

    अनुराग एक जासूस था ओर सुमित का पहचान वाला भी,उसने फोटोग्राफ्स टेबल पर पटकते हुए कहा ,अनुराग ये फोटो किसने,कब,ओर कहा बनाई इसकी इनफार्मेशन दे सकते हो मुझे?

    अनुराग ने फोटो हाथ में लेते हुए बोला ये किसके है ओर तुम्हें क्यू जानना है? 

    सुमित ने कहा ये जानना जरूरी नहीं है तुम्हारे लिए बस मुझे इनफार्मेशन दे दो काम होते ही तुम्हे पैसे मिल जाएंगे।कितना वक्त लगेगा?

     सुमित का सख्त लहजा देख अनुराग समझ गया मामला गंभीर है।उसने कहा 24 घंटे के अंदर अंदर इनफार्मेशन तुम्हारे पास पहुंच जाएगी।

     सुमित ने एक कार्ड देते हुए कहा इसमें नंबर है उसपे भेज देना ऐसा बोल सुमित बिना पीछे मुड़े उस गली से बाहर निकल आया ओर कार में बैठ गया।

   नीलिमा कमरे में अकेली थी उसने मोबाइल हाथ में लिया ओर प्रीतम को कॉल लगाया।

   हाई नीलू अभी तक जग रही हो? कॉल उठाते ही प्रीतम की आवाज आई।

    प्रीत......बस इतना बोलकर नीलिमा फूट फूट कर रोने लगी ये सुन प्रीतम घबरा गया ओर बोला नीलू क्या हुआ?ईटन क्यू रो रही हो?कुछ हुआ है क्या?

   पर नीलिमा कुछ नहीं बोल सकी वो बस रोए ही जा रही थी। प्रीतम ने कहा कुछ तो बोलो नीलू मेरा दिल बैठा जा रहा हैं।

   तभी तन्मय नीलिमा के कमरे में आया उसने देखा कि नीलिमा फ़ोन पे रोए जा रही है तो उसने फोन ले लिया ओर प्रीतम से बात करने लगा उसने सबकुछ बताया ये सुन प्रीतम भी टेंशन में आ गया।

   विष्णु ओर मनीष भी वही थे प्रीतम की बाते सुन वो भी चिंतित होकर पूछने लगे कि क्या हुआ। तभी प्रीतम ने उसे सब कुछ बताया ओर बोला पापा हमे अभी जाना होगा उसे हमारी जरूरत है।

    मनीष ने भी हालत को देखते हुए हा बोलदी ओर प्रीतम ने तन्मय को कॉल लगाकर बात दिया कि वो आ रहे है।

    तन्मय ने बात कर के अभी कॉल काटी ही थी कि सुमित भी घर आ गया।उसे देख तन्मय ने कहा पापा प्रीतम ओर विष्णु यहां आ रहे है।

   ये सुन सुमित ने कहा ये कोई टाइम है उसे यहां बुलाने का ? इतनी रात गए उसे इतना परेशान करना ठीक नहीं है। तन्मय ने कहा पर पापा वो तो निकल ही रहे है।

   सुमित ने कहा उसे कॉल लगाओ । तन्मय ने कॉल लगाई और कहा प्रीतम पापा बात करना चाहते है ऐसा कह तन्मय ने फोन सुमित को थमा दिया।

   सुमित ने फोन कान पर रखते ही बोला प्रीतम? उस तरफ से आवाज आई हा अंकल में प्रीतम।

   देखो बेटा अभी इतनी रात गए तुम्हारा आना ठीक नहीं है तुम कल सुबह आ जाना ओर टेंशन मत लो नीलिमा थोड़ी डर गई है ओर कुछ नहीं है। सुमित ने शांत स्वर में कहा।

   ये सुन प्रीतम ने कहा ठीक हैं अंकल हम सुबह आ जाते है।रखता हु।

   ऐसा कह उसने कॉल काट दी।ये सुन मनीष ने पूछा क्या हुआ बेटा कौन था फोन पे?

   प्रीतम ने कहा नीलिमा के पापा थे उसने कहा सब ठीक हैं अभी आने की जरूरत नहीं है।

   मनीष ने कहा ठीक हैं बेटा कल सुबह हम तीनों चलेंगे जाओ अभी सो जाओ।

   जी पापा कह के दोनों कमरे में चले गए पन आज प्रीतम की आंखों में नींद दूर दूर तक कही नहीं थी।