वर्तमान समय
असुर वंश = आज के आधुनिक आतंकी संगठन,
और उनकी उत्पत्ति जोड़ दी जाए गांधार
(काबुल–कंधार क्षेत्र) से जहाँ कभी शकुनि का राज्य था —
अश्वत्थामा जिस मणि को माथे पर धारण करता था, असुर वंश उसी मणि की तलाश में हैं उधर दैत्य गुरु शुक्राचार्य का एक सेवक उनका आहवान करके अश्व धामा तक पहुंचे की कोशिश कर रहा था ।
क्योंकि वह
अमरता,
अजेयता,
ऊर्जा नियंत्रण,
और समय के संतुलन को प्रभावित करने की शक्ति देती है।
और आज के आतंकवादी संगठन इसी असुर वंश के मानव-रूप वंशज हैं।
अब आगे ____
“गांधार की परछाइयाँ
हिमालय की गुफा के बाहर विस्फोट की गूँज पड़ी। ओर कुछ हलचल अश्व धामा हल्की सी आवाज को भी सुन महसूस कर सकता था ।
धूल हवा में तैरने लगी।
अश्वत्थामा तलवार की मुट्ठी पकड़ते ही पत्थरों को चीरकर बाहर निकल गया, जबकि योगेश्वर भी उसके पीछे था।
बाहर काले कपड़ों में सशस्त्र लोग दिखाई दिए जो बहुत दूर थे
उनके झंडे पर बना चिन्ह देखकर योगेश्वर चौंक गया।
एक काली त्रिशूल।
जिसके नीचे लिखा था — “गांधार-नेक्सस”
यह वही संगठन था जिसने दुनिया में दर्जनों हमलों की जिम्मेदारी ली थी।
पर कोई नहीं जानता था कि यह असल में आतंकियों का गठजोड़ नहीं…एक दैत्य गुरु शुक्राचार्य का शिष्य है
बल्कि असुर वंश का आधुनिक चेहरा है।
असुर वंश का आधुनिक इतिहास
अश्वत्थामा गर्जन भरी आवाज़ में बोला—
“गांधार…
एक समय शकुनी का राज्य था।
उसी की जाति में एक शाखा गुप्त रूप से असुरों से जुड़ी थी।
काल के साथ वही लोग आज के आतंकवादी संगठन बन गए।”
योगेश्वर स्तब्ध—
“मतलब यह संगठन पौराणिक असुर वंश का वंशज है?”
अश्वत्थामा:
“हाँ। बस तरीके बदल गए है एक युग था जब दैत्य गुरु शुक्राचार्य उनके गुरु थे उनकी पूजा करते थे लेकिन अब विज्ञान का युग है यहां पर हथियार और तकनीकि चीजें काम करती है लेकिन जो इन पर विश्वास करते पुराणों पर उनके लिए आज भी दैविक शक्ति है ।
महाभारत के बाद जब असुरों की शक्ति खत्म हुई, तो कुछ बची-खुची ऊर्जा गांधार में छिपाई गई थी।
सदियों तक यह शक्ति सुप्त रही…
लेकिन अब किसी ने उसे जगा दिया है।”
आतंकी दूर से गोलियाँ चलाने लगे।
अश्वत्थामा ने हवा में तलवार घुमाई—
धाराएँ अचानक ऐसी शक्ति से टकराईं कि गोलियाँ रास्ता बदलकर जमीन पर गिर पड़ीं।
योगेश्वर दंग रह गया—
“ये शक्ति… ये कोई एलियन टेक्नोलॉजी जैसी लगती है!”
अश्वत्थामा ने कहा—
“यह मेरी शक्ति है उनके पास भी आधुनिक हथियार है ओर शक्ति भी ये लोग उस मणि की तलाश में यहां तक आए है । वो शक्ति है जो मुझसे छीन ली गई थी।”
मणि का रहस्य — जिसे असुर वंश चाहता है
योगेश्वर दम साधकर खड़ा रह गया।
“मतलब मणि अब आपके पास नहीं?”
अश्वत्थामा की आँखें लाल हो उठीं—
“हाँ।
हजारों साल पहले, श्रापित होने के बाद मणि मेरे माथे से विलुप्त हो गई।
पर कहीं न कहीं वह धरती पर मौजूद है।”
योगेश्वर:
“और असुर वंश… उसे ढूंढ रहा है?”
अश्वत्थामा ने सिर हिलाया—
“क्योंकि मणि के बिना असुर वंश अधूरा है।
मणि मिलते ही वे—
अमरता, बल, और समय को मोड़ने की शक्ति पा लेंगे।”
योगेश्वर का मन सिहर गया।
“अगर वह गलत हाथों में गई… तो दुनिया का अंत तय है।”
अश्वत्थामा:
“इसलिए वे मुझे हज़ार सालों से ढूंढ रहे हैं।
क्योंकि मणि का रास्ता सिर्फ मैं दिखा सकता हूँ।”
गांधार–नेक्सस का कमांडर
धुआँ साफ होते ही पहाड़ की ढलान से एक आदमी प्रकट हुआ—
ऊँचाई में लंबा, चेहरे पर आधा मास्क, और आँखें…
काली आग की तरह। कुछ ही देर बाद दोनों का दूर से आमना सामना होना बाकी था
उसने कहा—
“अश्वत्थामा…
हजार साल तुझे खोजते रहे।
आज तू हाथ में आ ही गया।”
अश्वत्थामा गुर्राया—
“तुम लोग किसके वंशज हो? असुरों के… या शकुनी के?”
कमांडर:
“दोनों के।
तुम्हारे श्राप का अंत…
हमारी शुरुआत है।”
उसने हाथ उठाया।
दसों आतंकी एक साथ हमला करने लगे।
अश्वत्थामा का प्रचंड प्रहार
अश्वत्थामा आगे बढ़ा—
“आओ… गांधार के तथाकथित वारिसों।
आज तुम्हें असली युद्ध का अर्थ समझाता हूँ।”
उसकी तलवार से जैसे अग्नि जली।
उसने तीन हमलावरों को हवा में ही धकेलकर पहाड़ की गहराई में पटक दिया।
कुछ ही क्षणों में पाँच और गिर पड़े।
योगेश्वर अपनी मशीन से शॉक वेव छोड़ते हुए लड़ाई में शामिल हो गया।
फिर हुआ सबसे खतरनाक खुलासा
कमांडर ने जेब से एक वस्तु निकाली—
एक छोटा, काला, चमकीला पत्थर।
अश्वत्थामा की आँखें चौड़ी हो गईं—
“ये… ये तो…!”
कमांडर मुस्कुराया—
“हाँ।
यह मणि का एक टुकड़ा है।
हजारों साल पहले मणि टूट गई थी…
और इसके कुछ अंश विभिन्न जगहों पर छिपे थे।”
योगेश्वर स्तब्ध—
“मतलब पूरी मणि दुनिया में बिखरी हुई है?”
कमांडर:
“और आज…
हमने पहला टुकड़ा पा लिया है।”
जैसे ही उसने उस टुकड़े को हथेली में दबाया, उसके शरीर में काली ऊर्जा दौड़ पड़ी।
उसकी आवाज गहरी हो गई—
“जब यह मणि पूरी हो जाएगी…
असुर वंश फिर से देवताओं को चुनौती देगा।”
अश्वत्थामा दहाड़ा—
“अगर मणि पूरी हो गई…
तो तुम लोग दुनिया को नर्क बना दोगे।”
कमांडर हँसा—
“यही तो हमारा लक्ष्य है।
शकुनी के वंश का अंतिम स्वप्न—
‘धर्म का विनाश’।”
और उसी क्षण एक ब्लास्ट हुआ।
कमांडर धुएँ में गायब हो गया—
अपने लोगों के साथ। एक आवाज गूंजती रही हम वापिस आयेगे
— अश्वत्थामा का रहस्योद्घाटन
धुआँ मिटने पर योगेश्वर घबराए हुए बोला—
“ये क्या हो रहा है, अश्वत्थामा?
ये लोग इतने शक्तिशाली कैसे हो रहे हैं?”
अश्वत्थामा ने आकाश की ओर देखा—
“युद्ध शुरू हो चुका है।
यह वही युद्ध है जिसका संकेत ऋषियों ने हजारों साल पहले दिया था।
और यह युद्ध सिर्फ हम दोनों से नहीं जीता जाएगा।”
योगेश्वर:
“फिर कौन जीतेगा?”
अश्वत्थामा ने योगेश्वर की आँखों में देखते हुए कहा—
“वह…
जो आने वाले समय में मणि के मार्ग को पहचान सकेगा।
वह…
जिसके रक्त में प्रकाश और विज्ञान दोनों का मिलन है।”
योगेश्वर का दिल ठहर गया—
“क्या आप… मेरे बेटे आदित्य की बात कर रहे हैं?”
अश्वत्थामा ने बिना पलक झपकाए कहा—
“हाँ।
असुर वंश का अगला लक्ष्य—
वही है।”उसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकते है लेकिन तुम्हारे बेटे से जीत पाना उनके लिए असंभव है ।वो अपने आप में धर्मराज का अवतार है जिससे वो अभी अनजान है ।
क्या होगा आगे _
गांधार–नेक्सस द्वारा आदित्य पर पहला गुप्त हमला,
योगेश्वर और अश्वत्थामा का भूमिगत सफर,उसकी मदद
या मणि के दूसरे टुकड़े की खोज करेगा असुर वंश
लेखक भगवत सिंह नरूका ✍️