Deewane Ki Diwaniyat - Episode in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 8

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 8

बगावत के सुर
एपिसोड 8: छिपा मास्टरमाइंड, टूटती नींवदरभंगा की बारिश रुकी नहीं थी। जेल की सलाखों के पीछे भानु प्रताप चिट्ठी पढ़कर मुस्कुरा रहा था। कालिया पकड़ा गया, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी। बाहर, पृथ्वी राठौर सनाया के फ्लैट में बैठा चिट्ठी को बार-बार पढ़ रहा था। "भानु प्रताप अकेला नहीं। बड़ा मास्टरमाइंड बाहर है।" सनाया ने उसका हाथ थामा। "ये खत खत्म नहीं कर सकता हमें। स्टेशन प्रोजेक्ट रुका नहीं है। कल इंस्पेक्शन है, चलो वहाँ।" पृथ्वी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में शक का बीज बो चुका था। कौन है ये मास्टरमाइंड? कोई पुराना दुश्मन या नया?स्टेशन पर संकट
सुबह साइट पर हलचल थी। इंजीनियर और अधिकारी इंस्पेक्शन के लिए आए। पृथ्वी ने सबको संबोधित किया: "कल के ब्लास्ट से सिर्फ एक दीवार क्षतिग्रस्त हुई। काम जारी रहेगा। ये प्रोजेक्ट दरभंगा की तरक्की का प्रतीक बनेगा।" रमेश ने मजदूरों को इकट्ठा किया। सनाया चाय बाँट रही थी। तभी एक अनजान कार साइट पर रुकी। उतरा एक बुजुर्ग—सफेद दाढ़ी, कुर्ता-पायजामा। "मैं राय बहादुर हूँ, प्रोजेक्ट के फंडर। सुनने को मिला, यहाँ हादसे हो रहे हैं।" पृथ्वी ने स्वागत किया, लेकिन सनाया को वो चेहरा जाना-पहचाना लगा। पुरानी यादें दिमाग में कौंधीं—पापा के साथ मीटिंग्स में ये आदमी आता था।इंस्पेक्शन चला। राय बहादुर ने साइट घूमी, नोट्स लिए। "अच्छा काम हो रहा है, राठौर साहब। लेकिन सुरक्षा बढ़ाओ।" जाते वक्त उसने पृथ्वी को अलग बुलाया। "तुम्हारे पिता राजवीर मेरे दोस्त थे। उनकी मौत... दुखद।" पृथ्वी स्तब्ध। "आप जानते थे उन्हें?" राय ने मुस्कुराया, "बहुत।" कार चली गई, लेकिन पृथ्वी के मन में सवाल उमड़ आए।रहस्य का पीछा
शाम को पृथ्वी और सनाया रमेश के साथ मिले। रमेश ने कहा, "कालिया से पूछताछ में नाम निकला—राय बहादुर। भानु प्रताप का पुराना पार्टनर। लैंड डील्स में साथ थे। स्टेशन प्रोजेक्ट उनकी जमीन पर बन रहा है, वो इसे रोकना चाहते हैं।" सनाया चौंकी, "हाँ, पापा के साथ वो ही आदमी था। लेकिन मास्टरमाइंड?" पृथ्वी ने डायरी निकाली। "यहाँ लिखा है—आरबी के साथ साजिश। आरबी मतलब राय बहादुर!" तीनों ने प्लान बनाया। रमेश जासूसी करेगा, पृथ्वी पुलिस को इन्फॉर्म। सनाया बोली, "खतरा मेरा भी है। लेकिन डरूँगी नहीं।"रात में सनाया अकेली फ्लैट पर थी। फोन आया—अनजान नंबर। "सनाया, सच जानती है? राय बहादुर तेरे पापा का नहीं, दुश्मन था। वो राजवीर को मारने का मास्टरमाइंड है।" आवाज कालिया जैसी। सनाया घबरा गई। तभी दरवाजे पर दस्तक। उसने झाँका—राय बहादुर! "बेटी, बात करनी है। भानु प्रताप के बारे में।" सनाया ने दरवाजा खोला। राय अंदर आया, चाय माँगी। बातों-बातों में बोला, "तेरा पिता निर्दोष नहीं, लेकिन मैंने उसे फंसाया। स्टेशन मेरी जमीन छीन रहा है। राजवीर ने विरोध किया, इसलिए... हादसा।" सनाया ने रिकॉर्डिंग ऑन की। "तुमने मेरे पापा को भी बर्बाद किया?" राय हँसा, "खून पानी नहीं। अब तू चुप रह, वरना..."टकराव की रात
पृथ्वी को सनाया का मैसेज मिला—'राय यहाँ!' वो रमेश और पुलिस के साथ दौड़ा। फ्लैट पहुँचे तो मारपीट चल रही। राय ने सनाया को गला दबाया था। पृथ्वी ने धक्का दिया। "तुम! मेरे बाप के कातिल!" राय ने बंदूक निकाली। गोली चली—रमेश के कंधे पर। पुलिस ने घेर लिया। राय ने आत्मसमर्पण किया। "हाँ, मैंने राजवीर को ट्रक से टक्कर दी। भानु प्रताप मेरा कठपुतली था। स्टेशन रोकना था, ताकि मेरी पुरानी फैक्ट्री बचे।"जेल में राय और भानु प्रताप का सामना हुआ। भानु चिल्लाया, "तूने मुझे बेचा!" राय बोला, "तूने मेरी कमाई लूटी।" दोनों के राज खुल गए। कोर्ट में डायरी और रिकॉर्डिंग से केस मजबूत। स्टेशन प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।नई शुरुआत
एक हफ्ते बाद, साइट पर पूजा हुई। पृथ्वी और सनाया नींव रख रहे थे। रमेश पट्टी बाँधे मुस्कुरा रहा। सनाया ने कहा, "अब पुरानी दुश्मनी खत्म। हमारा स्टेशन दरभंगा बदलेगा।" पृथ्वी ने उसे गले लगाया। "और हमारा प्यार भी। शादी करेंगे, सनाया। नई जिंदगी।" शाम ढली, दोनों बालकनी में बैठे। सूरज डूबा, लेकिन उम्मीद चमकी।लेकिन कोर्ट से एक चिट्ठी आई। भानु प्रताप की आखिरी अपील: "मेरा बेटा बाहर है। असली बदला बाकी।" दरभंगा की शांति फिर डगमगाई...