इतिहास के पन्नों से 19
नोट - अब तक ‘ इतिहास के पन्नों से ‘ श्रृंखला के 18 भाग पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं पर इतिहास क्या है और इतिहास के जनक पर चर्चा करना स्मरण नहीं रहा था . इस भाग में इसी पर चर्चा है -
इतिहास क्या है - आसान शब्दों में कहा जाय तो इतिहास अतीत का लेखा जोखा है जिसमें भूत में हुई घटनाओं , सभ्यताओं ( और उनके विकास ) , संस्कृतियों और प्रसिद्ध व्यक्तियों ( अच्छा या बुरा ) के बारे में लिखा गया हो . आमतौर पर इसमें घटनाओं का वर्णन कालक्रम के अनुसार ( Chronicle ) होता है . इतिहास में अतीत को पढ़कर उससे अच्छी बातों को खीखा जा सकता है और गलतियों को सुधारकर वर्तमान या भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है .
इतिहास का स्रोत - इतिहास अतीत का दर्पण होता है . हमारी या किसी भी अन्य सभ्यता के प्राचीन ग्रंथों , पूर्वजों की जीवन शैली , संस्कृति , आर्थिक व्योरा आदि आर्काइव ( archive अभिलेखागार ) में मौजूद दस्तावेजों और प्राचीन अवशेषों से इतिहास का ज्ञान होता है .
इतिहास कितना पुराना - लेखन ( writing ) का आरम्भ करीब 5000 वर्ष पूर्व हुआ था .माना जाता है कि सर्वप्रथम लेखन की शुरुआत मेसोपोटामिया ( सुमेरियन 3400 - 3200 BCE ) , मिस्र और चीन ( 1200 -1050 BCE ) में हुआ था . सिंधु घाटी में भी यह ( pictorial writing 3000 - 3500 BCE ) के बीच शुरू हुआ था जबकि लिखित वर्णन 300 BCE से मिलता है . इससे पहले का काल प्रागैतिहासिक (Prehistory) कहलाता है .
इतिहास का महत्व - इतिहास सिर्फ प्राचीन राज्यों बीच के युद्ध की कथा नहीं है बल्कि यह वह दर्पण है जिससे हम पुरानी गलतियों से सबक लेकर वर्तमान और भविष्य को सुधार सकते हैं . पुराने समय की राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक धार्मिक पहलूओं को पढ़कर और समझकर उनसे सीख ले सकते हैं . इतिहास से हम जान सकते हैं कि आज हमारा जो भी रहन सहन , संस्कृति , बोली , धर्म आदि हैं वे कैसे प्राचीन काल से विकसित हो कर यहाँ तक पहुंचे हैं . इसके अतिरिक्त हम इनसे सीख ले कर कैसे बेहतर भविष्य की योजना बना सकते हैं , जैसे - साम्राज्यों का उत्थान या पतन कैसे हुआ , मजबूत देश के लिए एकता जरूरी है वरना हम अंग्रेजों या मुग़लों के गुलाम नहीं बनते , हिलटर ने WW 2 में भीषण ठंड में रूस पर हमला और दो मोर्चों पर युद्ध करने की गलती की ,आदि .
इतिहास के जनक - मान्यता है कि लिखित इतिहास का आरंभ हेरोडोटस (Herodotus) ने 5th BCE ( ईसा पूर्व ) में किया था . इसलिए उन्हें ‘ इतिहास के पिता ‘ (Father of History) कहा गया है . वे तत्कालीन यूनान ( Greece ) के विख्यात इतिहासकार और भूगोलविद थे . उन्होंने घटनाओं को क्रमानुसार व्यवस्थित कर "Ionic dialect" ( आयोनी भाषा , प्राचीन ग्रीक भाषा ) में प्रस्तुत किया था . मूल रूप से यह ग्रीक ,फारस और उसके निकट साम्राज्यों का इतिहास ( विशेषकर उनकी संस्कृति और युद्ध के बारे में ) था . इस पुस्तक का नाम ‘ द हिस्ट्रीज ‘ (The Histories) था .’ द इतिहास ‘ को 425 BCE में हेरोडोटस ने संकलित कर प्राचीन ग्रीक पेपर ( papyrus rolls ) पर लिखित रूप में प्रस्तुत किया था . बाद में ’ द इतिहास ‘ का लैटिन भाषा में अनुवाद पहली बार 1474 CE में तत्कालीन पेपर बुक फॉर्म में प्रकाशित किया गया . 1954 में पेंगुइन प्रकाशन ने इस पुस्तक को आधुनिक पेपर बुक फॉर्मेट में प्रकाशित किया है .
हेरोडोटस इतिहास का पिता कैसे बने - हेरोडोटस की किताब ‘ द इतिहास ‘ आधुनिक ऐतिहासिक शोध में एक फाउंडेशन स्टोन कहा जाता है . उन्होंने पहली बार इतिहास लिखने की कला या शैली को उजागर किया है . उन्होंने तत्कालीन घटनाओं को न सिर्फ सुना बल्कि उनकी यथासंभव जांच की और उन्हें व्यवस्थित कर क्रमानुसार लिखा था . उन्होंने दंतकथाओं से अलग एक वैज्ञानिक डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया था . हेरोडोटस ने पहली बार इतिहास शब्द ( history ) का उपयोग किया जिसका शाब्दिक अर्थ ‘ खोजबीन या अनुसंधान ‘ होता है .
भारत का नाम - ’ द इतिहास ‘ के तीसरे भाग में हेरोडोटस ने भारत के बारे में भी वर्णन किया है . इसमें भारतीयों की त्वचा के रंग और उनके खानपान का वर्णन मिलता है .
Trivia - विडंबना यह है कि जहाँ एक तरफ हेरोडोटस को इतिहास का जनक कहा गया है दूसरी तरफ कुछ लोग उन्हें ‘ झूठ का पिता ‘ भी कहने से नहीं चूकते हैं . ऐसा इसलिए है कि उनके कुछ विवरणों की सटीकता पर संदेह किया गया है या उन्हें प्रश्नों के घेरे में रखा है .
क्रमशः
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