Mout ki Dastak - 20 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 20

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 20

हवेली की आख़िरी रात
बरसात की वह रात जैसे किसी अधूरी कहानी की तरह आसमान पर टंगी हुई थी। बादलों की गरज से धरती काँप रही थी और बिजली की चमक अँधेरे को चीरकर किसी रहस्य का इशारा कर रही थी। शहर से दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—वक़्त की मार से टूटी हुई, मगर अब भी अपने भीतर अनगिनत राज़ समेटे।
लोग उसे “विरान हवेली” कहते थे। कहते हैं, वहाँ जो भी गया… वापस नहीं लौटा।
आरव, जो पेशे से लेखक था, ऐसी कहानियों को अंधविश्वास मानता था। उसे रहस्यों से प्यार था, और वह चाहता था कि उसकी अगली किताब कुछ ऐसी हो जो लोगों की रूह तक उतर जाए। जब उसे इस हवेली के बारे में पता चला, तो उसने तय कर लिया—यहीं से उसकी नई कहानी जन्म लेगी।
गाँव वालों ने उसे बहुत समझाया।
“बाबू, रात के बाद उधर मत जाइए,” एक बूढ़ा आदमी काँपती आवाज़ में बोला, “वो हवेली जिंदा है… और उसे अकेलापन पसंद नहीं।”
आरव हँस पड़ा। “हवेलियाँ जिंदा नहीं होतीं, बाबा। उनमें बस कहानियाँ होती हैं।”
लेकिन उसे क्या पता था कि कुछ कहानियाँ खुद को लिखवाती हैं… और फिर लेखक को ही मिटा देती हैं।
रात के दस बजे वह टॉर्च और डायरी लेकर हवेली के फाटक पर पहुँचा। लोहे का दरवाज़ा जंग खाया हुआ था। जैसे ही उसने उसे धक्का दिया, दरवाज़ा एक लंबी चीख़ के साथ खुला—मानो किसी ने दर्द में कराह भरी हो।
अंदर घुसते ही उसे ठंडी हवा का एक झोंका महसूस हुआ, जबकि बाहर उमस भरी गर्मी थी।
“दिलचस्प…” उसने बुदबुदाया।
हॉल में कदम रखते ही उसके पैरों के नीचे धूल की मोटी परत चरमराई। दीवारों पर पुराने चित्र टंगे थे—अजनबी चेहरों के, जिनकी आँखें अँधेरे में भी चमक रही थीं।
आरव ने टॉर्च ऊपर उठाई। तभी उसे लगा… जैसे एक चित्र की आँखें उसकी हरकत के साथ घूम गईं।
“दिमाग का वहम है,” उसने खुद को समझाया।
वह सीढ़ियों की ओर बढ़ा। हर कदम के साथ लकड़ी की सीढ़ियाँ कराह रही थीं। ऊपर एक लंबा गलियारा था, जिसके दोनों ओर कमरे थे। सबसे अंत वाले कमरे से हल्की रोशनी झाँक रही थी।
“यहाँ बिजली कैसे?” वह चौंका।
दरवाज़ा आधा खुला था। उसने धीरे से उसे धकेला।
कमरे के बीचोंबीच एक पुरानी कुर्सी रखी थी… और उस पर कोई बैठा था।
आरव की साँस अटक गई।
वह एक लड़की थी—सफेद साड़ी में, लंबे काले बाल चेहरे पर झुके हुए। वह स्थिर बैठी थी, जैसे किसी का इंतज़ार कर रही हो।
“कौन… कौन हो तुम?” आरव ने काँपती आवाज़ में पूछा।
लड़की ने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया।
उसका चेहरा असामान्य रूप से पीला था। आँखें गहरी और काली… इतनी काली कि उनमें कोई पुतली नहीं दिख रही थी।
“तुम आ गए…” उसकी आवाज़ फुसफुसाहट जैसी थी, मगर कमरे में गूँज रही थी।
आरव पीछे हट गया। “तुम यहाँ क्या कर रही हो?”
लड़की मुस्कुराई—एक अजीब, टेढ़ी मुस्कान।
“मैं यहीं रहती हूँ। सदियों से।”
कमरे की खिड़कियाँ अचानक ज़ोर से बंद हो गईं। हवा ठंडी से बर्फ जैसी हो गई।
“तुम… इंसान नहीं हो,” आरव के मुँह से निकला।
लड़की खड़ी हुई। उसके पैर ज़मीन से कुछ इंच ऊपर थे।
“तुम्हें कहानी चाहिए थी ना?” उसने धीरे से कहा, “तो सुनो…”
अचानक कमरे की दीवारें बदलने लगीं। पेंटिंग्स जीवित हो उठीं। आरव ने देखा—हर तस्वीर में वही लड़की थी… और हर तस्वीर के बगल में एक आदमी।
वह आदमी हर बार अलग था।
लेकिन हर तस्वीर में एक चीज़ समान थी—उस आदमी की आँखें डरी हुई थीं… और तस्वीर के नीचे लिखा था: “वह कभी वापस नहीं लौटा।”
आरव का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। “ये सब क्या है?”
लड़की उसके करीब आई। “मैं अकेली थी। बहुत अकेली। जो भी यहाँ आता है… उसे मैं अपनी कहानी का हिस्सा बना लेती हूँ।”
“तुम पागल हो!” आरव चिल्लाया और दरवाज़े की ओर भागा।
लेकिन दरवाज़ा गायब था।
अब चारों ओर सिर्फ अँधेरा था… और लड़की की हँसी।
“तुम लेखक हो,” वह बोली, “तुम्हें तो समझना चाहिए… कुछ कहानियाँ कभी खत्म नहीं होतीं।”
अचानक आरव को महसूस हुआ कि कोई अदृश्य हाथ उसकी गर्दन पकड़ रहा है। उसकी साँस रुकने लगी। उसने टॉर्च गिरा दी। रोशनी फर्श पर घूमती रही।
उसकी डायरी खुली पड़ी थी।
और उसमें शब्द खुद-ब-खुद लिखे जा रहे थे—
“आज रात मैं हवेली में आया। मैंने उसे देखा। वह सुंदर थी… मगर उसकी आँखों में मौत थी। अगर कोई यह पढ़ रहा है… तो समझ लेना—वह तुम्हारा इंतज़ार कर रही है…”
आरव की चीख़ पूरे जंगल में गूँज उठी।
फिर सब शांत हो गया।
सुबह गाँव वाले हवेली के बाहर इकट्ठा थे। रात को उन्होंने चीख़ सुनी थी। हिम्मत करके कुछ लोग अंदर गए।
हॉल वैसा ही था—धूल भरा, सन्नाटा पसरा हुआ।
ऊपर वाले कमरे में एक नई तस्वीर टंगी थी।
उसमें एक युवक था—हाथ में डायरी लिए, आँखों में डर।
नीचे लिखा था:
“आरव – वह भी कभी वापस नहीं लौटा।”
और कुर्सी पर वही लड़की बैठी थी… मुस्कुराती हुई।
जैसे किसी और का इंतज़ार हो।
कई साल बीत गए।
लोग अब भी कहते हैं—उस हवेली में एक लड़की रहती है। वह बहुत सुंदर है। वह कहानियाँ सुनाती है। और जो उसकी कहानी सुन ले… वह खुद कहानी बन जाता है।
अगर कभी आपको किसी वीरान जगह से कोई फुसफुसाहट सुनाई दे—
तो पीछे मुड़कर मत देखिए।
क्योंकि हो सकता है… वह आपके लिए ही इंतज़ार कर रही हो।