Quotes by Rakhi in Bitesapp read free

Rakhi

Rakhi

@authorsahiba
(5)

खामोशी को पन्नों पर उतार अपनी क़िस्मत को लिख रही थी ,में ।
एक नई मंजिल पर कदम रख अपनी कामयाबी की ओर बढ़ रही थी, में।।

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' चलो कुछ नया बुनते हैं , न '


रिश्ता सिर्फ एक ही कंधे पर क्यों ?, दोनों मिलकर निभाते हैं न । , बोझ सिर्फ़ एक ही कंधे पर क्यों ?दोनों मिलकर उठाते हैं न।।

अगर गलती हुई है तो, कलंक सिर्फ एक ही के माथे पर क्यों? दोनों मिलकर लगाते हैं न।
सिर्फ़ भागी हुई लड़की ही क्यों? भागे हुए लड़के भी कहलवाते हैं न ।।

परिवार की इज्ज़त बचाना सिर्फ़ एक ही के हाथ में क्यों?, दोनों साथ में बनाते हैं न ।
नियम सिर्फ़ एक पर ही लागू क्यों ?दोनों मिलकर निभाते हैं न।।

यदि एक आगे बढ़ जाए तो घबराते क्यों हो ?, बस थोड़ा अना को परे रख, हाथ पकड़, क़दम क़दम मिलाकर साथ चलते हैं, न।


पुराने सड़े गले धागों को धुल कर ,नए धागों को चुनते है, न।
चलो कुछ नया बुनते है, न।

राखी

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क्या है कविता?

क्या है कविता?, मैं यदि कहूं तो वह भावनाएं जो स्वयं से फूट कर आएं और शब्दों को इतना चमत्कृत बनाएं कि ,वह स्वयं कविता बन जाए।

जिसमें किसी का रोष दिखे तो हो व्यंग्य भरा हास्य भी ,साथ में प्रेम भी हो,और ममता भरी करुणा।
हो अतीत का चित्र और वर्तमान के लिए संदेश भी, साथ में भविष्य की उज्जवलता हो, नवांकुरो के लिए कामनाएं भी।।

जिसमें समाज का कटु सत्य भी और राजनीति का झूठा मुखौटा,हो एकजुटता और मानवता का संदेश भी । क्या यही है कविता हां यदि मैं कहूं तो यही है कविता।।
राखी

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धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है , कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम

आज चल रहे हैं ,तो क्या
कल दौड़ कर भी दिखलाएंगे हम ।
धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
उम्मीद है कि ,यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम ।

आज हारे हैं, तो क्या कल जीतकर भी दिखलाएंगे हम ।धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है ,कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।

आज गम हैं तो क्या कल खुशियों को भी लाएंगे हम धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है ,कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।

आज तन्हा हैं तो क्या कल मेफिलो में भी जाएंगे हम।
धीरे धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है कि ये इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।

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