क्या है कविता?
क्या है कविता?, मैं यदि कहूं तो वह भावनाएँ जो स्वयं से फूट कर आएं और शब्दों को इतना चमत्कृत बनाएँ कि, वह स्वयं कविता बन जाए।
जिसमें किसी का रोष दिखे, तो हो व्यंग्य भरा हास्य भी। साथ में प्रेम भी हो, और ममता भरी करुणा।
हो अतीत का चित्र और वर्तमान के लिए संदेश भी, साथ में भविष्य की उज्जवलता हो, नवांकुरो के लिए कामनाएं भी।।
जिसमें समाज का कटु सत्य भी और राजनीति का झूठा मुखौटा, हो एकजुटता और मानवता का संदेश भी। क्या यही है कविता? हां यदि मैं कहूं तो यही है, कविता।।
राखी