उदास दिल की ख़ामोशी में, ढूँढो मत अब कोई वजह,
बीत गई जो काली रातें, ढलने लगी है हर सुबह।
आँखों में जो ठहरे आँसू, बह जाने दो राहों में,
सब कुछ खोकर भी मिलता है, नया सफ़र निग़ाहों में।
थमी हुई इस गहरी साँस को, आज ज़रा तुम आज़ाद करो,
जो टूट गया वो कल था यारो, आज नए दिन का आगाज़ करो।
- Ritu kumari