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___निशाग्नि___ मन के पीर, जिया के रीढ़ बन, स्मृतियाँ सारी उभर रही हैं हृदय-पटल पर। आँखों के अश्रु सब सूख, कर्पूर की बाती जस जलन रहे हैं हर दस्तक पर। आज इन नेत्रों में निद्रा नहीं, निशाग्नि नाच रही है मेरे मस्तक पर, अंतर्मन की चेतना भी हिल उठी है अब तो अंतस पर।
माँ जैसी स्त्रियाँ माँ जैसी स्त्रियाँ माएँ रूपांतरित हो जाती हैं पत्नी, बेटी और बहन के रूप में; पर बाप, भाई, पति का रूपांतरण आज तक न हो सका माँ के रूप में। अर्थात पुरुषों को माँ के पश्चात भी माँ जैसी स्त्रियाँ मिल जाती हैं, किन्तु स्त्रियों के स्त्रीत्व के हाथों कभी लग न सकी ये स्त्रियाँ। पर कभी सोचा है क्यों..? softrebel
*पारस जइसन प्रेम* भरल वसंत में बरसल सारस जइसन, प्रेम होखे ना सबके पारस जइसन। मोह वास और काम के इच्छा भरल बा सबमें पैतृक जायदाद के जइसन, होखे ना लोगवा प्रेम से परिचित, कऽ देला सब कुछ मवाद के जइसन। जे जियेला उहे जानेला अमृत के हाल, मीरा से पूछऽ काहे लागेला अवसाद के जइसन। softrebel
_मौन की चीख_ तल्फ़त मन के भार से, जठराग्नि हुई है अब तो तृप्त, सेवा-मेवा कुछ भी, मन के आगे सब भीख। अशक्त हो गए हैं अश्रु मेरे, जब भाव भरे हैं मुझमें रिक्त, स्तब्ध है जब हृदय की स्पंदन, फिर कानों में कैसी ये चीख। - softrebel
आँख के तेज चेहरा के चमक देख, हमार गुस्सा हो जाला फिका। कद काठी मे हमरा से लमहर बाड़े, पर बाड़े जइसे गोदी मे छोटहन लइका। हिया से हुलसत दिया से अँजोर, भईल बा कौनो जादू टोना बेजोड़। अब तूँ न जनबऽ तऽ का जनहिहे माई कमइछा! - softrebel
शीर्षक: स्वतंत्र भारत हम स्वतंत्र भारत में नेताओं द्वारा पारित किए गए गणतंत्र के गुलाम हैं जहाँ आज़ादी एक तमाशा है और गुलामी एक सुव्यवस्था। बधाई हो स्वतंत्र भारत के नागरिकों आपकी चुप्पी से ही चलती है भारत की सत्ता। Softrebel #UGC
बहल बयार अईसन बसंत बहार भइल बा पीयर सरसो खिलऽल जइसे प्रीत के फूल पियऽराइल बा बाग भईल बा मन के अंगना जियरा नेह नहाइल बा पोर पोर उठेला सिहरन हियरा हुल्लसाइल बा असो फगुआ ई रंग मे रंगाइल बा... - softrebel
हर काश यदि तय हकीकत होती, तो इंसान इंसान न रहकर भगवान हो चुका होता… इंसान की इंसानियत सदैव इंसान बने रहने में है; भगवान बनने की हर कोशिश उसे भीतर से विचलित और बाहर से बोझिल कर देती है। और शायद मैं इन इंसानों की दुनिया में रहने वाली एक विचलित आत्मा हूँ, जिसका आत्म–शरीर कहाँ जा छूटा, मुझे स्वयं भी ज्ञात नहीं — और इन भगवानों की श्रेणी में कदाचित मेरा कोई स्थान नहीं। 🥀 - softrebel
हुए हैं इश्क़ से खफ़ा खफ़ा हम तुमसे तो नहीं, तुम्हारी जिंदादिली हो तुम दोनों को मुबारक हमारे पास तुम्हारे सिवा कुछ नहीं इंतज़ार की घड़ी टिक टिक करके चल रही है यहीं कहीं शायद तुम जहां से निकल आए या शायद जहां मै खड़ी रह गई वहीं। - softrebel
चिता सजे, मंत्र हों, अग्नि जले— पर प्रतीक्षारत आँखें बंद मत कीजिए। अंतिम संस्कार की एक ही परंपरा, आज आप परिवर्तित कर दीजिए। 🫂🌚✨ - softrebel
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