😍🖤बस इस दृश्य को महसूस करने के लिए
प्रकृति की छांव में जाना जरूरी है...!
सुनो आरती,
गांव जाना अब मजबूरी है..!
वो काली घटाएँ, वो खेत-खलिहान,
तेज हवा के झोंके से
झूम रहे बगीचे के ऊपर वो खुला आसमान।
मिट्टी की सड़क और मिट्टी का ही दुआर,
बगल के खेत में
खेल-खेल में कलरव कर रहे
विवेक चा संग संगतियों की किलकार।
दुआर पर बैठे बूढ़े बाबा,
रिस रहे खप्पर से आ रही बूंद बूंद करके मिट्टी की छींटकार।
ओड़िया सूप ओढ़ कर पानी भरती हुई मेरी मां
चुते हुए ओरी के नीचे लबलबाई बाल्टी संग आंगन में खुदा छोटा-सा इनार।
#village