स्कूल में सब कुछ सामान्य और खुशहाल लग रहा था, लेकिन बिकाश और माया के रिश्ते में अब नए अनुभव आने वाले थे। पहली डेट के बाद, दोनों का रिश्ता और भी मजबूत हो गया था, लेकिन जैसे हर रिश्ते में छोटी-छोटी परेशानियाँ आती हैं, वैसे ही अब उनका पहला झगड़ा आने वाला था।
शुरुआत: छोटी-छोटी बातें
एक सोमवार की सुबह, क्लास में सभी बच्चे पढ़ाई में व्यस्त थे। बिकाश अपने नोट्स पढ़ रहा था, और माया अपनी कॉपी में कुछ लिख रही थी। अचानक, माया ने सोचा कि बिकाश ने उसके पिछले मैसेज का जवाब नहीं दिया।
माया ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“बिकाश, तुम मेरे मैसेज का जवाब क्यों नहीं दे रहे थे कल रात?”
बिकाश ने सिर झुकाया और कहा,
“मुझे लगा तुम सो रही होगी, इसलिए मैंने जवाब नहीं दिया। मैं व्यस्त भी था।”
माया थोड़ी नाराज़ हो गई।
“तुम हमेशा यही कहते हो! कभी मेरी फीलिंग्स को समझते ही नहीं!”
बिकाश चुप हो गया। वह जानता था कि माया सही थी, लेकिन उसे यह भी एहसास हुआ कि यह सिर्फ़ एक छोटा झगड़ा है।
पहला झगड़ा: नज़दीकियों में मतभेद
दोपहर के समय, स्कूल की छुट्टी में, दोनों खेल के मैदान में मिले।
माया ने हल्की नाराज़गी में कहा,
“तुम हमेशा मेरी बातों को अनदेखा करते हो।”
बिकाश ने धीरे से कहा,
“मैं ऐसा नहीं करता माया, तुम्हारे बिना तो मैं कुछ भी नहीं हूँ।”
माया ने उसके चेहरे की ओर देखा, लेकिन फिर भी उसने मुड़कर कहा,
“ठीक है… शायद मैं ही बहुत ज्यादा सोचती हूँ।”
लेकिन दोनों जानते थे कि यह झगड़ा खत्म नहीं हुआ। उनकी आँखों में हल्की नराज़गी थी।
दोस्ती का मज़ाक और हल्का दिलासा
स्कूल के कुछ दोस्त दोनों को देखकर हँस पड़े।
“वाह! प्यार में झगड़ा भी इतनी प्यारी जोड़ी को शोभा देता है!”
दोनों ने शर्माते हुए मुस्कुराया।
बिकाश ने माया की तरफ़ देखा और कहा,
“माया, मुझे माफ कर दो। मैं सच में तुम्हारे लिए हमेशा अच्छा बनना चाहता हूँ।”
माया की आँखों में आंसू तो नहीं थे, लेकिन हल्की चमक थी।
“ठीक है बिकाश… मैं भी माफी चाहती हूँ। मैं कभी-कभी छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना देती हूँ।”
दोनों ने हँसते हुए हाथ मिलाया। यह पहला झगड़ा उनके रिश्ते को और मजबूत बना गया।
पहली माफी और प्यार की गहराई
शाम के समय, स्कूल के पीछे वाले पार्क में, दोनों अकेले बैठे। हवा हल्की ठंडी थी और सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था। बिकाश ने माया की आंखों में देखा और कहा,
“माया, मैं सच में तुमसे माफी चाहता हूँ। तुम्हारी फीलिंग्स मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। मैं नहीं चाहता कि हमारा प्यार छोटी-छोटी बातों से कमजोर हो।”
माया ने धीरे से हँसते हुए कहा,
“बिकाश… मुझे भी माफ कर दो। मैं कभी-कभी जल्दी नाराज़ हो जाती हूँ। पर अब मैं जानती हूँ कि हम हमेशा एक-दूसरे के लिए हैं।”
दोनों ने अपने हाथों को कसकर थाम लिया। उनका प्यार अब सिर्फ़ आकर्षण नहीं, बल्कि समझ, सम्मान और विश्वास बन चुका था।
रोमांटिक पल और हँसी-मज़ाक
माफी के बाद, दोनों पार्क की झील के किनारे घूमने लगे। माया ने मज़ाक में कहा,
“देखो बिकाश, अब तुम मेरी बातों का ध्यान रखोगे, या फिर मैं फिर नाराज़ हो जाऊँगी?”
बिकाश मुस्कुराया और हँसते हुए बोला,
“मैं अब हर समय तुम्हारे साथ रहूँगा, चाहे तू नाराज़ हो या खुश।”
माया ने उसकी तरफ़ झुककर कहा,
“ठीक है, लेकिन तुम्हें अब मेरे गुस्से को भी सहना होगा।”
बिकाश ने हँसते हुए कहा,
“माया… मैं तुम्हारा सब सह सकता हूँ। क्योंकि तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ।”
दोनों की हँसी, झूलों पर झूलना, और एक-दूसरे की बातों पर मुस्कुराना – यह पल उनकी दोस्ती और प्यार को और गहरा बना गया।
Episode 5 का अंत
रात ढलते-ढलते, दोनों घर लौटने लगे। माया ने धीरे से कहा,
“आज का दिन बहुत खास था। हमें यह याद हमेशा रहेगी।”
बिकाश ने मुस्कुरा कर कहा,
“माया… अब हम जानते हैं कि प्यार सिर्फ़ खुशी नहीं, बल्कि झगड़े, माफी और समझ भी है। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”
उस रात, बिकाश और माया ने महसूस किया कि उनका रिश्ता अब सिर्फ दोस्ती और रोमांस तक सीमित नहीं रहा। यह विश्वास, समझ, और एक-दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहने की भावना बन चुका था।
पहला झगड़ा खत्म हो गया, लेकिन यह उनके प्यार को और गहरा और मजबूत बना गया।
अब दोनों जानते थे कि चाहे जीवन में कितनी भी छोटी-छोटी परेशानियाँ आएँ, उनका प्यार हर मुश्किल का सामना कर सकता है।