Pahli Nazar ka Ishq - 8 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | पहली नज़र का इश्क - 8

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पहली नज़र का इश्क - 8

स्कूल की सुबह हमेशा हलचल और बच्चों की हँसी-मज़ाक से भरी रहती थी। लेकिन आज का दिन बिकाश और माया के लिए कुछ अलग और रोमांचक होने वाला था।
सुबह की हलचल और योजनाएँ
क्लास में सभी बच्चे अपनी सीटों पर बैठे थे। बिकाश और माया आम दिनों की तरह आपस में हँसी-मज़ाक कर रहे थे। तभी उनके दोस्त ने उन्हें एक मज़ेदार आइडिया दिया।
“चलो आज शिक्षक को प्रैंक करते हैं! लेकिन ध्यान रखना, यह सिर्फ मज़ाक होना चाहिए,” दोस्त ने कहा।
माया ने आँखें चमकाकर कहा,
“ठीक है! लेकिन बिकाश, हमें साथ में करना होगा। अकेले तो डर लगेगा।”
बिकाश ने हँसते हुए कहा,
“मैं तुम्हारे साथ हूँ माया। चलो, देखते हैं शिक्षक कैसे प्रतिक्रिया देंगे।”
दोनों ने मिलकर एक छोटा, harmless प्रैंक प्लान किया।
पहला रोमांचक प्रैंक
माया और बिकाश ने शिक्षक की डेस्क पर एक नकली जेली और रंगीन पानी का गिलास रखा। योजना यह थी कि जब शिक्षक उसे उठाएँगे, तो हल्का सा मज़ेदार सरप्राइज होगा।
जैसे ही शिक्षक डेस्क की ओर आए, दोनों की धड़कन तेज हो गई।
“तुम तैयार हो?” माया ने फुसफुसाया।
“हाँ!” बिकाश ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
शिक्षक ने गिलास उठाया, और जैसे ही हल्की जेली गिराई, क्लास में हँसी का ठहाका गूंजा। शिक्षक भी हँस पड़े और बोले,
“तुम दोनों ने बहुत ही शरारती तरीका खोजा है! लेकिन मज़ा आया।”
बिकाश और माया एक-दूसरे की तरफ़ देखकर हँस पड़े। उनका पहला प्रैंक सफल हो गया और क्लास में माहौल और भी हल्का और मज़ेदार बन गया।
मज़ेदार पल और दोस्ती
प्रैंक के बाद, क्लास में दोस्तों ने हँसी-मज़ाक शुरू कर दिया।
“वाह! बिकाश और माया ने तो कमाल कर दिया!”
माया ने अपने हाथों में किताबें पकड़े कहा,
“सच में, यह दिन यादगार बन गया।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“और सबसे खास बात, यह सब तुम्हारे साथ होना।”
दोनों ने शरारत और हँसी के बीच अपनी दोस्ती और प्यार को और गहरा महसूस किया।
छोटी नोक-झोंक और प्यार की नज़दीकियाँ
छुट्टी के समय, पार्क में दोनों अकेले बैठे।
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बिकाश, तुम्हें पता है, कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि तुम बहुत शांत रहते हो। थोड़ी मस्ती और करो।”
बिकाश ने हँसते हुए कहा,
“मस्ती तो मैं तुम्हारे साथ करता हूँ। तुम ही मेरी मस्ती की वजह हो।”
माया ने उसकी ओर झुककर कहा,
“ठीक है, लेकिन अगली बार मैं तुम्हें भी चौंकाऊँगी।”
बिकाश ने हल्की हँसी के साथ कहा,
“मैं तैयार हूँ माया… तुम्हारे बिना यह मज़ा अधूरा होता।”
झूले पर बैठकर, दोनों ने हवा में झूलते हुए अपने पल को मज़ेदार और रोमांटिक बना लिया।
स्कूल की छोटी चुनौतियाँ
दोपहर में, स्कूल ने बच्चों के लिए एक सिंपल स्कैवेंजर हंट रखा। बिकाश और माया ने टीम बनाकर भाग लिया।
“तुम जल्दी चलो, माया!” बिकाश ने उत्साह से कहा।
“तुम पीछे रह रहे हो!” माया ने हँसते हुए चिढ़ाया।
रास्ते में, माया का पाँव फिसला, लेकिन बिकाश ने तुरंत उसे संभाला।
“तुम ठीक हो न?” बिकाश ने पूछा।
“हाँ, अब मज़ा आ रहा है,” माया ने मुस्कुराते हुए कहा।
दोनों ने मिलकर हर चुनौती को पूरा किया और एक-दूसरे पर भरोसा और बढ़ाया।
रात का रोमांटिक पल
दिन खत्म होते-होते, पार्क की झील के किनारे, दोनों अकेले बैठे। हवा ठंडी थी और सूरज ढल रहा था।
बिकाश ने धीरे से माया का हाथ थामते हुए कहा,
“माया, आज का दिन यादगार था। तुम्हारे साथ रहकर हर पल खास बन जाता है।”
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“और मैं भी बिकाश… तुम्हारे बिना यह सब अधूरा लगता।”
दोनों ने हाथ कसकर थाम लिया। झील की हल्की लहरें, हवा की ठंडी बूँदें और सूरज की आखिरी किरणें – सब कुछ उनके प्यार और दोस्ती को और गहरा बना रही थीं।
Episode 8 का संदेश
इस एपिसोड ने यह दिखाया कि:
पहला प्रैंक और मज़ाक रिश्ते में मज़ेदार पल जोड़ते हैं।
छोटे-छोटे रोमांच, खेल और चुनौतियाँ प्यार और दोस्ती को गहरा बनाती हैं।
पहली बार रोमांच और विश्वास के साथ बिताए पल रिश्ते को मजबूत बनाते हैं।
बिकाश और माया अब केवल पहले प्यार के साथी नहीं थे, बल्कि सच्चे दोस्त, मस्ती के साथी और भरोसेमंद साथी भी बन चुके थे।