लड़की चाहे मध्यम वर्ग के परिवार की हो गरीब की या फिर किसी अमीर बाप की शहजादी क्यों ना हो सब की इच्छा होती ही है की उनकी लाइफ में कोई आए जो उनका ज़िंदगी के हर मोड़ पर साथ दे
बिना पूछे दिल की हर बात जान ले।
कहे बिना हर दर्द भांप ले।
हर लडकी ही जीवन में ऐसा जीवन साथी चाहती है। जो उसे सही से समझे।
गीता का पति शुरुआत से इतना जुआरी या शराबी ना था। छोटा सा घर और वह अकेला। लोगों का उसकी शादी से पहले बस एक ही अनुमान था । की अरे इसकी शादी करदो कोई काले मुड़ की आयेगी इसे अपने आप सुधार देगी।
"मगर दिक्कत ये थी कि अब ऐसे इंसान से शादी"
जो दारू पीता हो,,,,, मांस मदिरा का खूब सेवन करता हो।
आदत जिसकी खराब। चौराहों पर खड़े होकर सिगरेट फूकना। ओर वहा से निकलने वाली औरतों लड़कियों पर कमेंट बाजी करना। इन सब से उसने अपनी छवि सब के मन में बहुत मेली बना ली थी। इन सब के चलते आखिर कोन सा बाप अपनी बेटी का हाथ ऐसे जुआरी के हाथ में दे देता। क्या पता
"आज जो घर है उसे भी पीने में लगा दे। ओर सारा मामला शराब में सलटा के पत्नी को भी जुए में लगा दे।"
इतना जोखिम भरा आदमी। आखिर कैसे कोई बाप अपनी मासूम सी जान जिसे उसने बचपन से पाला हो इस इंसान को सौंप दे।
ओर फिर लड़की आखिर उसकी भी तो ईच्छा होती है की यहां तक जैसी ज़िंदगी अकेले कटी सो कटी। कम से कम आगे तो इसके साथ हमेशा एक मत और होना चाहिए। जो उसका सब जगह साथ दे।
दोनों का एक खुशहाल परिवार हो। जिम्मेदारी हो मगर उनके साथ एक खुशी भी हो। परिवार में बड़ो का हाथ हो सिर पर।
मगर गीता की किस्मत में कुछ और ही लिखा था।
बाप अपनी इन आदतों को वजह से कर्जे में जा चुका था। अब बस तयारी थी तो उनको घर से निकालने की। लेनदार रोजाना उनकी चोखट पर आकर खड़े हो जाते तगादा करने। ओर गीता की मां को उनको बस एक आश्वासन देना पड़ता की अब से ये सुधर जाएंगे और आपका कर्जा जल्दी ही चुकता कर देंगे।
इन सब के चलते गीता की मां के गहने तक बिक चुके थे। एक औरत अपने गहनों को भी इस लिए सजा कर और छुपा कर रखती है क्युकी वह उसकी सुंदरता बढ़ाने के साथ साथ मुश्किल वक्त में रिश्तेदारों से भी ज्यादा अहम भूमिका निभा जाते है मदत करने में।
मगर उनको भी गीता के पिता "गीता की मां को मार मार कर छीन कर ले गए थे। " ओर यह सब गीता देखती रह जाती वो असहाय सी कुछ ना कर पाती।
मगर वो ऐसे सोचती की में मेरे पति को समझा बुझा कर रखूंगी। और ऐसी नोबत कभी नहीं आने दूंगी। ओर किस्मत वाला होगा वो इंसान जिसकी ज़िंदगी में,,,
में जाऊंगी
मगर ये सब कहा लिखा था उसकी ज़िंदगी। में उसे तो कुछ पता भी नहीं था।
गीता के पिता उसके लिए शादी के लिए लड़का ढूंढ ही रहे थे। ब्याह की टेंशन उनको खाए जा रहीं थी।
आखिर बेटी का ब्याह था टेंशन तो होनी ही थी जाहिर सी बात है।
बेटी की उमर हो गईं थी। ओर थी भी खूबसूरत तो उसके लिए रिश्ते भी बहुत आते। संस्कारी थी। ऐसा नहीं है उसके लिए रिश्ते नहीं आए। आते थे। बहुत आते थे। मगर रिश्ते की बात जब भी चलती शुरुवात में खूब जोर शोर रहता। की हां जी हां ये सही है वो हमारी बेटी ऐसी है और लड़के के पक्ष वाले की हम इसको रानी बना कर रखेंगे।
मगर बात जब लेने- देने ( दहेज ) तक पहुंचती। तब सब बातें धरी की धरी रह जाती। की दिया इनसे कुछ ना जा रा और सपने महलों के।
इसी तरह गीता का रानी बनने का सपना टूट ता दिखाई देता।
इन्हीं सब के बीच गीता के पिता अचानक किसी ऐसे इंसान से टकरा जाते है जो गीता के होने वाले पति का पड़ोसी था।
"वो बताता है की आप वहा जुगाड़ बिठा लो लड़का अकेला है। ओर बहुत मेहनती है। इज्जत भी खूब करता है सभी की ।
अकेला लड़का है और उसके पास तो उसका खुद का घर भी है। आप की गीता वहा रानी बन कर रहेगी रानी।
मगर गीता के पिता उस इंसान से पूछते है की उनकी कुछ मांग भी होगी।
तभी वो इंसान गीता के पिता के कान में कुछ कहता है। उनकी आंखें चमक जाती है।
ओर वो फॉरन उस लड़के को देखने के लिए बुला लेते हैं।
"लड़का सांवला था और दूसरी तरफ गीता तो उसके आगे स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम न लग रही थी। वो देखते ही पहली ही नजर में मर मिट ता है गीता की सूरत पर। "
ओर दुसरी तरफ गीता। उसकी सीरत पर मर रही थी की ऐसा इंसान जिसने उसके पिता से एक रुपया नहीं मांगा वो उनका बेटा बनकर उनकी मदत कर रहा है।
दिल का कितना साफ़ इंसान। गीता मन ही मन सपने सजाने लग जाती है। वो सोचती है की यहां से कितना ज्यादा खुश रहूंगी में इनके यहां। रानी बन कर रहूंगी रानी।
ऊपर से गीता के माता पिता वो भी गीता को बहुत चने के झाड़ पर चढ़ाए जा रहे थे की ऐसा रिश्ता दोबारा नहीं आएगा।
मगर गीता की मां थोड़ी ना खुश थी इस रिश्ते से। लगाता है उन्होंने उस आदमी और गीता के पिता की बाते सुन ली थी। उनके मन में तो चल भी रहा था की मना करवा दे रिश्ते की। मगर तब तक वो गीता का होने वाला पति गीता के दिल और दिमाग़ में अपना घर बना चुका था।
गोद भराई के वक्त ही उसने अपने सास ससुर को कर्जे से मुक्ति दिला दी थी। ओर गीता के लिए एक सोने की अंगूठी बनवाई थी।
दोनों की सगाई हो गई और उसने गीता को ये महसूस करवा दिया की वो ही अब उसकी दुनिया है। ओर उसके घर की लक्ष्मी वो ही हैं। उससे बढ़ कर उसके लिए कुछ भी नहीं है।
To be continued..............