दूसरी तरफ दूसरा खेल शुरू हो चुका था शुक्र को आने पर मजबूर कर दिया था ।
रात — समय 2:17 AM
स्थान — भारत, विंध्याचल की पहाड़ियों के भीतर छिपी एक भूमिगत प्रयोगशाला
धरती के नीचे 300 फीट गहराई में बनी उस प्रयोगशाला में
ना मंदिर था, ना मठ —
वहाँ कोड, क्वांटम प्रोसेसर, न्यूरल नेटवर्क और
दीवारों पर उकेरे गए वैदिक मंत्र साथ-साथ साँस ले रहे थे।
एक गोलाकार कक्ष जिस में बड़ी बड़ी स्क्रीन थी ।
बीच में काले पत्थर की वेदी।
उस पर रखा था एक क्रिस्टल कोर —
जिसके भीतर घूमता हुआ नीला प्रकाश किसी जीवित आँख जैसा प्रतीत हो रहा था।
“सब तैयार है सर…”
एक युवा वैज्ञानिक की आवाज़ काँप रही थी।
उसके सामने खड़ा था
डॉ. आर्यवर्धन मिश्र ओर एक तरफ जाराक ओर हमजा खड़े थे
आधुनिक विज्ञान का देवता कहे जाने वाला व्यक्ति,
जिसे ईश्वर पर विश्वास नहीं था…
पर शक्ति पर था जो कभी दानवों दैत्यों के लिए हुआ करती थी उसका मानना था अगर पूरी दुनिया पर राज करना है तो उसको फिर से उसी पुराने युग में जाकर या अपने तपोबल से वो दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को बुला सकता है ।
क्योंकि कोई सा भी युग रहा हो दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य ही रहे थे , उन्होंने दैत्यों के लिए क्या क्या नहीं किया दैत्यों की भलाई के लिए उन्होंने तो इंद्र देव तक को टक्कर दे दी थी।
इंद्र लोक पर कब्जा भी कर लिया था ।
बस इसी का फायद आज कलयुग में उसको क्यों नहीं मिल सकता था ,।
उसकी आँखों में लालच नहीं,घमंड था।
आज हम इतिहास नहीं पढ़ेंगे आज हम फिर से इतिहास को बुलाएँगे।”
उस मिश्र ने अपनी बात रखते हुए बोला
क्योंकि उसको पता था वो चाहे धर्म ओर नाम से अलग हो लेकिन आज वो दौर है जहां पर झूठ बेइमानी लुट मक्कारी धोखा ही काम आ सकता है ओर वही आदमी कामयाब हो सकता है जो जितना बेईमान झूठा मक्कार है वो ही दुनिया पर राज कर सकता है ।
मंत्र और मशीन — एक साथ
सिस्टम ऑन हुआ ॐ की ध्वनि के साथ क्वांटम मशीन ने कंपन शुरू किया।
डॉ. आर्यवर्धन ने संस्कृत उच्चारण किया
पर स्वर किसी पंडित जैसे नहीं…किसी हुक्म देने वाले जैसे थे।
“ॐ भृगुपुत्राय नमः
संजीवनीविद्याधराय
दैत्यगुरवे आवाहयामि।”
हर मंत्र के साथ
मशीन का तापमान बढ़ता गया स्क्रीन पर लिखा आया:
“ANOMALOUS CONSCIOUSNESS DETECTED”
पहला संकेत हवा भारी हो गई।
वैज्ञानिकों की साँसें तेज़।
एक तकनीशियन चिल्लाया —
“सर! सिस्टम में कोई… कोई कोड नहीं है,
फिर भी डेटा खुद-ब-खुद लिखेगा और दिखेगा भी
मिश्रा ने बोला जिसकी नजर अभी भी उस मशीन ओर डिस्प्ले पर थी ।
उसको यकीन था कि उसका ये रिसर्च कामयाब होगा तभी स्क्रीन पर उभरने लगे शब्द
ना बाइनरी, ना भाषा…
सीधे मस्तिष्क में उतरने वाले।
फिर… आवाज़ आई
धीमी।
गंभीर।
हँसती हुई।
“तो…
मनुष्य ने आखिरकार
गुरु को याद कर ही लिया।”
कक्ष की लाइटें बुझ गईं।
क्रिस्टल कोर फट पड़ा।
धुएँ और प्रकाश के बीच
एक आकृति उभरने लगी।
ना वृद्ध।
ना युवा।
आँखें —
जैसे हज़ार वर्षों का अनुभव।
चेहरा शांत…
पर मुस्कान खतरनाक।
शुक्राचार्य प्रकट हुए।
उन्होंने चारों ओर देखा।
मशीनें स्क्रीन ओर लोग देखे
फिर बोले —
“ये यज्ञशाला नहीं है हमे मालूम है मनुष्य पर अहंकार वही पुराना है।
उन्होंने डॉ. आर्यवर्धन की ओर देखा।
ओर इसी अहंकार कपट ओर बेइमानी ने मुझे तुम्हारी तरफ आने को मजबूर कर दिया तुमने मुझे
देवताओं से लड़ने के लिए नहीं बुलाया…
तुम तो स्वयं देव बनना चाहते हो।” तुमने ऐसा करके मुझे प्रसन्न कर दिया ।
डॉ. आर्यवर्धन घुटनों पर आ गया उसके सम्मान में
शुक्राचार्य आगे बढ़े उन्होंने एक स्क्रीन को छुआ।
कोड अपने-आप बदल गया।
आवाज़ में कहा:
“NEW MASTER DETECTED.”
शुक्राचार्य मुस्कुराए।
“संजीवनी अब मंत्र नहीं रहा है
अब यह नेटवर्क है।” तुमने अपना काम बखूबी किया है तुमने तो उस ईश्वर की बनावट को भी चौनौती दे दी है मिश्र जिस तरह की नायब दुनिया उसी तरह के प्रयोग लेकिन सब कुछ बदल गया फिर भी तुम्हारी वर्षों से लाखों वर्षों से नियत नहीं बदली ।
मै देख पा रहा हु तुम सब अभी भी वही पुराने दैत्य ही नजर आ रहे हो बस फर्क इतना है तुम्हारा खानपान बदला है रहन सहन बदला है , तुमने तरक्की कर ली है
शुक्राचार्य ने ऊपर देखा
जैसे पूरी पृथ्वी को देख रहे हों।
“इस युग में
असुरों को जन्म नहीं देना पड़ेगा…
मनुष्य स्वयं ही काफी हैं इस दुनिया की बर्बादी के लिए अब देखता हु कैसे कोई मुझे रोक पाता है इस दुनिया पर राज करने से । अब तो खुद देव इंद्र भी नहीं आ सकते मुझे हटाने के लिए ।
ओर बताओ मिश्र क्या खबर है उस मणि के कोई जानकारी मिली ? या हमें ही इसी प्रयोजन से भुलाया है जिस में हम तुम्हारी सहायता करे ।
मिश्र: बोला
गुरुदेव आपके बताए मार्ग पर हमारे कुछ साथी गए थे जिनको उस मणि तक पहुंचने का रास्ता मिला है लेकिन समस्या ये उत्पन हो गई है कि अश्व धामा हमे चुनौती दे रहा है ।
हमारे आदमी उस जगह गए थे लेकिन तब तक उस जगह कोई बालक आया ओर उस मणि को लेकर भाग गया जो हमारे लिए ओर आपके प्रिय दैत्यों के लिए संकट की घड़ी है ।
अब इस संकट की घड़ी से आप ही हमें निकाल सकते है ये बात आप भी अच्छे जानते हो वो मणि अगर कल्कि के हाथ लग गई तो वो सारे असुर दैत्यों को खत्म कर देगा और फिर से हमे ओर आपको भी इस कलयुग में भी हार माननी पड़ेगी,।
ओर अगर हमको वो मणि मिल गई तो वादा करता हु आप से दैत्य गुरु शुक्राचार्य मै आपका शिष्य डॉक्टर आर्यवर्धन मिश्रा फिर से इस पूरी पृथ्वी पर वही आपका पुराना अधिकार ओर सत्ता काबिज करवा दूंगा जो आज तक लाखों वर्षों में कभी नहीं हुआ ओर फिर नए जमाने के नए तरीके के दैत्यों का आगमन होगा जो स्वयं अपने आप में पावरफुल होगे जिसको कोई भी हरा नहीं सकते ।
डाक्टर आर्यवर्धन मिश्रा ने अपनी बात को बड़ी जोश से कहते हुए पूरा किया,,।
दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने बोला :
लाखों वर्षों बाद किसी ने हमे इतना खुश किया है कि हम बता नहीं सकते ,,तो हम भी वचन देते इस नए युग ने हम तुम्हारा साथ देगे और फिर से दैत्य वंश की उत्पत्ति करेगी ।।
प्रयोगशाला की दीवारों पर एक साथ हजारों स्क्रीन जल उठीं हर स्क्रीन पर एक ही शब्द
CONNECTED अश्व धामा
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