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Beni Kumar Singh

Beni Kumar Singh

@benisagar


🌸हुआ इश्क़ भी है🌸

हुआ इश्क़ भी है, और कोई नाम भी नहीं,
सामने हो तुम, मगर दिल को आराम भी नहीं।

जो था अजनबी, वो अब हमसफ़र हो गया है,
कैसा ये सफ़र है,धूप तो बहुत है, मगर शाम भी नहीं।

गुस्ताख़ियाँ करता है दिल, नादान भी है बेचारा,
चढ़ती शराब-सा है, मगर हाथ में जाम भी नहीं।

हुस्न का दीवाना कब था मैं, तुम मिले तो रूबरू हुआ,
बूँद-बूँद तुझमें बह जाना था, और कोई अरमान भी नहीं।

ख़ुद को रोक लेती हो, मुझे भी सबक देती हो,
आग़ोश में आती तो हो,फिर दर्द से अनजान भी नहीं।

बरसों बीते, मुद्दतों बाद यूँ मिले हैं हम,
पास तो हैं मगर, दिलों के बीच कोई पैग़ाम भी नहीं।

कभी आँखों से बातें थीं, कभी ख़ामोशी में इकरार था,
अब लबों पर मोहब्बत है, मगर वो पहले-सा उफ़ान भी नहीं।

अजीब रिश्ता है अपना, न मुकम्मल, न अधूरा,
तुम मेरी ज़िंदगी हो,मगर मेरा कोई अंजाम भी नहीं।

जिस्म करीब हैं, साँसें भी एक-दूसरे को छूती हैं,
मगर रूह तक पहुँचने का कोई इल्ज़ाम भी नहीं।

हुआ इश्क़ भी है, और कोई नाम भी नहीं,
तुम मेरे सामने हो, मगर दिल को आराम भी नहीं।

✍️बेनी सागर

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मोहब्बत की प्यास

आपकी बाँहों में लिपटकर महसूस करना है,
आपके जिस्म में उतरकर खो जाना है।

है ख़याल ऐसा मेरे हमदम,
कि हर फ़ासले को आज मिटाना है।

बरसों से जो प्यास लिए बैठी हो दिल में,
उस सूखी-सी चाहत को आज भिगो आना है।

मै बारिश बनकर तेरी रूह पर बरस जाऊं,
तुझे प्यार की हर बूँद में डूब जाना है।

बरसों की प्यासी ज़मीं हो तुम,मेरे हमदम,
अपनी मोहब्बत से तुम्हे सींच आना है।

✍️बेनी सागर

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एक ख़ालीपन-सा था कभी इस सफ़र में,
तुम मिले तो रौशनी उतर गई नज़र में।

वक़्त ने भी कैसी-कैसी चालें चल दीं,
अपने ही खड़े मिले हमारे विरुद्ध शहर में।

कल तक जो मेरी ख़ामोशियों को पढ़ते थे,
आज वही मशगूल हैं मेरी ख़बर में।

तोहमतों की धूल उड़ाकर चले गए लोग,
सच मगर अब भी साँस ले रहा है असर में।

हमने मोहब्बत को कभी सौदा नहीं समझा,
दिल ही रखा हर रिश्ते की रहगुज़र में।

अब न शिकायत है, न किसी से गिला कोई,
जो बचा है, वही काफ़ी है इस सफ़र में।

अगर गिरा भी हूँ, तो फिर सँभलकर उठूँगा,
हौसला अभी ज़िंदा है मेरे जिगर में।

✍️ — बेनी सागर

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कैसी अब मजबूरी रहने लगी है,
थोड़ी-थोड़ी अब दूरी रहने लगी है।

पहले हर बात पे होती थी बातें दिल की,
अब तो खामोशी भी ज़रूरी रहने लगी है।

वो जो हर रोज़ मेरी राह तका करते थे,
उनकी आँखों में भी अब बेनूरी रहने लगी है।

हमने चाहा था जिसे अपनी मोहब्बत की तरह,
उसकी चाहत भी अब अधूरी रहने लगी है।

जिसे अपना समझा था उम्र भर के लिए हमने,
उसी से मिलने में अब मजबूरी रहने लगी है।

जाने किस मोड़ पे आकर ये मोहब्बत बदली,
दिल में चाहत है मगर मोहब्बत बुरी रहने लगी है।

✍️बेनी सागर

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खौलती चाय जैसे , इश्क मेरे रगों में हो
बेचैन धुवां जैसे, हलचल धड़कनों में हो

आ जा ना संभाल लो आगोश में लेकर
दहकती आग जैसे , मेरे जवान बदन में हो

तेरे आने से साँसों में चिंगारी-सी उठे,
तेरी चाहत की तपिश मेरी हर छुअन में हो।

लब खामोश रहें, आँखें सब कुछ कह जाएँ,
ऐसी शिद्दत-ए-मोहब्बत मेरी नयन में हो।

रात महके तेरी जिस्म की खुशबू से इस क़दर,
जैसे सावन की पहली बारिश रुदन में हो।

तू छू ले तो मेरी रूह भी दहकने लगे,
तेरे इश्क़ की हरारत मेरी नशेमन में हो।

हम मिलें तो ये आलम हो कि दुनिया भूल जाएँ,
बस तू मेरे पहलू में हो और चर्चा भुवन में हो।

✍️बेनी सागर

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🌸मोहब्बत की प्यास🌸

रसीले होंठों की तबस्सुम पी लूँ,
झील-सी आँखों में डूब जाऊँ।
बरसों से तड़पा हूँ मोहब्बत के लिए,
तुम मुझमें ठहरो, मैं तुझमें बरस जाऊँ।

तेरी साँसों की खुशबू में महकता रहूँ,
तेरी धड़कन बनकर दिल में धड़कता रहूँ।
जो अधूरी रही अब तक ये चाहत मेरी,
तेरी बाँहों में आकर मुकम्मल हो जाऊँ।

तेरे इश्क़ की बारिश में यूँ भीग जाऊँ,
तेरी चाहत में हर पल मैं निखर जाऊँ।
तू बाँहों में ले ले मुझे एक बार,
मैं बादल बनूँ और ज़ोर से गरज जाऊँ।

✍️बेनी सागर

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🌸पाजेब की झंकार🌸

तेरे पैरों की पाजेब की तान कुछ कह रही है, छनक-छनक ये पायल की झंकार कुछ कह रही है।

कब तक खेलूँ मैं घुँघरुओं से यूँ अठखेलियाँ, पिया, अब तो कर लो प्यार—बहार कुछ कह रही है।

है इशारा मेरी आँखों की शरारत में, तेरी साँसों की महक दिल को पुकार कुछ कह रही है।

मेरी चूड़ी की खनक जब रात खनकती है, होती चाँदनी भी जैसे बेक़रार कुछ कह रही है।

तेरे आने से महक उठता है मेरा हर मौसम, हवा छूकर मेंरी ज़ुल्फ़ों को प्यार कुछ कह रही है।

लब खामोश हैं फिर भी दिल की बातें साफ़ हैं, तेरी धड़कन मेरी धड़कन से इकरार कुछ कह रही है।

कब तलक यूँ दूर रहकर इश्क़ को तड़पाएँ हम, मिलन की ये रात हमसे बार-बार कुछ कह रही है।

‘सागर’ अब तो छोड़ दे ये चाँद-सितारों की बातें, तेरी महबूबा तेरी बाँहों का हार कुछ कह रही है।

✍️बेनी सागर

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🌸हसीन चेहरा🌸

हसीन चेहरा जैसे खिला गुलाब मिला,
नज़र उठी तो कोई आफ़ताब मिला।

सुबह जब आँख खुली नींद से मेरी,
रात का ख़्वाब भी जैसे बेहिसाब मिला।

तेरी मुस्कान ने मौसम बदल दिया,
उदास दिल को कोई शादाब मिला।

तेरे आने से महकने लगीं राहें,
हर कदम पर मुझे नया इक ख़्वाब मिला।

जिसे ढूँढ़ता रहा उम्र भर मैं,
वो सुकून बनके तेरे साथ मिला।

न था यक़ीं कि मोहब्बत भी लौटेगी,
मुझे फिर प्यार का इक जवाब मिला।

अब न माँगूँगा दुआ में कुछ और,
तेरे रूप में मुझे मेरा माहताब मिला।

✍️बेनी सागर

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🌸किसका है🌸

खोए हो ख़्वाब में, ये इंतज़ार किसका है,
आँखों में ये नशा और ये ख़ुमार किसका है।

लबों पे है शराब, निगाहों में है नशा,
बताओ तो सही, ये इकरार किसका है।

अल्हड़पन तेरी अंगड़ाई में कुछ कह रहा है,
खिलता हुआ ये रूप, ये बहार किसका है।

ज़ुल्फ़ों की घटा छाई है तेरे चेहरे पर,
इस चाँद पर ठहरा ये निखार किसका है।

तेरी हर अदा में मोहब्बत झलकती है,
दिल में छुपा हुआ ये प्यार किसका है।

हम तो समझे थे कि तुम यूँ ही मुस्कुराए हो,
फिर आँखों में ये मीठा ख़ुमार किसका है।

सागर, तेरी बातों में राज़ गहरा है कोई,
तू बता दे आखिर ये इंतज़ार किसका है।

✍️बेनी सागर

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🌸मोहब्बत की रुस्वाई🌸

तूने ही तो ये दुनिया बसाई है,
फिर क्यों आँखों में दर्द उतर आई है।

चुना था मोहब्बत का रास्ता तुमने,
फिर सफ़र में क्यों ये रुसवाई है।

तेरे क़दमों में सजदा करता था हमदम तेरा,
अब ये शिकवा क्यों कि तू हरजाई है।

जिसे अपना समझकर उम्र गुज़ारी,
उसी ने आज दूरी क्यों बनाई है।

तेरी यादों से रोशन था मेरा घर,
अब हर तरफ़ क्यों तन्हाई है।

हमने तो वफ़ा को इबादत समझा,
फिर हिस्से में क्यों सिर्फ़ जुदाई है।

✍️बेनी सागर

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