🌸किसका है🌸
खोए हो ख़्वाब में, ये इंतज़ार किसका है,
आँखों में ये नशा और ये ख़ुमार किसका है।
लबों पे है शराब, निगाहों में है नशा,
बताओ तो सही, ये इकरार किसका है।
अल्हड़पन तेरी अंगड़ाई में कुछ कह रहा है,
खिलता हुआ ये रूप, ये बहार किसका है।
ज़ुल्फ़ों की घटा छाई है तेरे चेहरे पर,
इस चाँद पर ठहरा ये निखार किसका है।
तेरी हर अदा में मोहब्बत झलकती है,
दिल में छुपा हुआ ये प्यार किसका है।
हम तो समझे थे कि तुम यूँ ही मुस्कुराए हो,
फिर आँखों में ये मीठा ख़ुमार किसका है।
सागर, तेरी बातों में राज़ गहरा है कोई,
तू बता दे आखिर ये इंतज़ार किसका है।
✍️बेनी सागर