Free Hindi Thought Quotes by Roopanjali singh parmar | 111781333

मैं तुम्हें वैसे ही देखती हूँ जैसे किसी पिंजरे में कैद परिंदा देखता है आसमान को।
उसे आसमान चाहिए, मुझे तुम!
-रूपकीबातें
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