ज़हरीली यादें
लाख धोखा दिया तूने, फिर भी तेरा ही चेहरा याद आता है, दिल के वीराने में अब भी वही टूटा हुआ किस्सा याद आता है।
हर झूठ तेरे लबों से जैसे सच बनकर उतरता है, आज भी उस झूठ का मीठा-सा रिश्ता याद आता है।
वफ़ा की राह पर चलकर भी बेवफ़ाई ही पाई मैंने, मगर तन्हाई में तेरा ही सपना याद आता है।
ज़हर भी पिया तेरे नाम का, मुस्कुराकर हर दर्द सहा, आज तलक वही मीठा ज़हर-सा प्याला याद आता है।
लह से लिखे थे ख़्वाब जो, वक़्त ने सब जला दिए, राखे में दबा हुआ हर अरमान सुलगता याद आता है।
विकास दिल ने जिसे ख़ुदा समझ तराशा था कभी, आज उसी के लिए हर रोज़ तरसना याद आता है।