कुछ लम्हों को जी लेना चाहिए।
वक्त कहां वापस लौटता है?
तुम पर्वतों के बीच से निकल रहे
सूर्य को देख रहे हो,
यदि कोई मिल जाए साथ में चाय पीनेवाला तो?
फिर क्या???
यार साथ में चाय पी लेनी चाहिए।
सागर का शांत किनारा हो,
और उछलती लहरों का ही शोर हो।
फिर क्या???
कोई रेत पर बैठे बैठे बातें करता मिल जाए तो?
दोस्त दो बातें कर लेनी चाहिए,
अरे, सूर्यास्त को भी हंसते हुए देखा जा सकता है।
सही में कोई अपना मिल जाएं तो
पानी, पर्वत में छुप रहे भानु को देखा जा सकता है।
सही में कुछ लम्हों को महसूस करके ही जिंदगी क्या है?
सही मायने में समझा जा सकता है।