थल सेना दिवस (15 जनवरी) पर विशेष
स्वयं से पहले सेवा
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मोहन सिंह के नेतृत्व में उन्नीस सौ बयालीस को
स्थापित भारतीय राष्ट्रीय सेना।
जिसे भारतीय सेना दिवस के रूप में
पंद्रह जनवरी को मनाए जाने के पीछे
जनरल करियप्पा कारण हैं,
क्योंकि इसी दिन उन्होंने
भारतीय सेना की कमान संभाली थी,
तब से यह दिवस खास हो गया।
इस दिन देश भर में जगह-जगह
विभिन्न कार्यक्रमों के साथ दिल्ली में
भव्य परेड का आयोजन
करियप्पा परेड ग्राउंड पर किया जाता है,
सेना के हथियारों - उपकरणों का प्रदर्शन कर
अपनी सैन्य क्षमता का मौन संदेश
समूचे विश्व को दिया जाता है,
थल सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान का
यशोगान किया जाता है।
मगर हमारी सेना का उद्देश्य भी
अत्यंत पावन- निर्मल और साफ है
'स्वयं से पहले सेवा' ही का सूत्र
अपने आप में बड़ा खास है।
इस सर्व-स्वयंसेबी बल में सक्रिय रक्षा कर्मियों का
अस्सी फीसद से अधिक का हिस्सा है,
हमारी सेना का स्थायी बलों में विश्व में दूसरा स्थान है,
जिसमें लगभग बारह लाख सक्रिय
और दस लाख आरक्षित सैनिक का खुला आसमान है।
जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है
जिसके कारण वह घरों में चैन से होता है।
हमें अपने जाँबाज सैनिकों पर नाज है
जिनके लिए मातृभूमि ही सिर का ताज है,
जो मातृभूमि की रक्षा के लिए
कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं,
सिर पर कफ़न बांधे, हथेली पर जान लेकर चलते हैं
प्राणों का आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते हैं,
अपनी भारत माता की आन-बान-शान के लिए
किसी भी हद तक जाने के लिए
हमेशा तैयार रहते हैं।
आज जल सेना दिवस पर हम उनका
बधाइयां शुभकामनाएं देते
सार्वजनिक अभिनंदन करते हैं,
जय हिन्द, वंदेमातरम, भारत माता की जय का
जयघोष कर गुणगान करते हैं,
अपनी सेना के शौर्य, प्रराक्रम, वीरता पर
हम सब भारतवासी अभिमान करते हैं।
हम शांति के पुजारी हैं
मगर दुश्मनों के लिए हम काल बन जाते हैं,
पीठ पीछे वार नहीं करते
दुश्मन कोई भी, कैसा भी हो
सीना तानकर आगे बढ़ते हैं,
क्योंकि हम भारतीय सेना के थल सैनिक जो हैं।
सुधीर श्रीवास्तव