सुबह की धूप जब खिड़की से अंदर आती है,
तो वो सिर्फ रोशनी नहीं लाती…
वो रात भर की थकान भी चुपचाप समेट ले जाती है।
ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है।
हर दिन कोई बड़ी जीत नहीं मिलती,
कभी सिर्फ चाय का गरम कप,
किसी अपने की हल्की-सी मुस्कान,
या रास्ते में मिली ठंडी हवा ही काफी होती है
दिल को फिर से चलने के लिए।
आज का दिन भी वैसा ही हो सकता है।
शायद कोई बड़ा चमत्कार न हो,
पर अगर मन शांत रहे
और कदम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ते रहें,
तो वही दिन सबसे अच्छा बन जाता है।
सुप्रभात।
आज थोड़ा कम सोचिए,
थोड़ा ज्यादा जी लीजिए।