तुम्हारा स्पर्श साधारण नहीं था।
वह जैसे आत्मा तक उतर जाने वाली कोई
मौन स्वीकृति थी ।
महसूस करते हुए उसी क्षण जान लिया कि यह मात्र स्पर्श नहीं, प्रेम का उच्चार है
कुछ स्पर्श क्षण भर में विलीन नहीं होते,
वे हृदय के उस कोने में अपना स्थायी घर बना लेते हैं,
जहाँ उदासी के समय
सबसे अधिक सहारे की आवयश्कता होती है..!!