मैं और मेरे अह्सास
रंग
प्यार का रंग उतरने में वक्त तो लगता हैं ll
खुदा हाफिस कहने में वक्त तो लगता हैं ll
लौटकर कोई वापिस नहीं आता जानकर l
समय के साथ बहने में वक्त तो लगता हैं ll
दिल टूटे और आवाज़ भी ना हो तो सखी l
खामोशी से दर्द सहने में वक्त तो लगता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह