लौट आऊँगी कभी
तुम्हारी चौखट पर ,
ज़रा ज़माने की ठोकर खा तो लूँ
यूँ भी तुम्हारे अहं की चोट तो
हर बार सही है
इस बार दूसरे ग़म भी झेल तो लूँ
तुममें गुरूर है ,तल्ख़ी है ,बदमिज़ाजी है
मुझमें एक प्यार के सिवा क्या है ??
ज़रा ख़ुद को तुम्हारे लायक बना तो लूँ !!
ख़ुद को तुम जैसा जालिम बना तो लूँ
फिर लौट आऊंगी तुम्हारी चौखट पर
ज़रा ज़माने की ठोकर खा तो लूँ
♥️♥️♥️♥️❌❌♥️♥️♥️♥️♥️
writer bhagwat singhnaruka ✍️✅