*एक उम्र के बाद*
एक उम्र के बाद आता है ऐसा मोड़ भी
मन बेचैन रहता है भाता नहीं कुछ भी
सभी बेगाने लगते हैं गैरों में कुछ अपने भी
खो जाती है हँसी कहीं, और मुस्कान भी
कोई बात करे ना करे, चाहे मन का सुकून ये दिल
सब कुछ खो देने पर कुछ पाना भी मुश्किल
जो समय पर ना मिले सब व्यर्थ है
प्रेम और सम्मान ही जीवन का अर्थ है
मन को जब भाने लगा अकेलापन
कोयल की कूक मोर का चुलबुलापन
कभी याद आता है खोया बचपन
और वो याद भी बन जाती है तड़पन
जिन्दगी को समझना ही क्या
जियो और जीने दो किसी से उलझना ही क्या
खुद में खोना भी जिंदगी है
खुद से मिलना भी जिंदगी है
किसी के काम आए तभी जिंदगी है
किसी रोते को हँसाए तभी जिंदगी है ।
---dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi