🙏🙏सच्ची बातें हमेशा कड़वी होती है???
नहीं कभी नहीं।
बस वह सोचने-विचारने वाले इंसान के नजरिए पर निर्भर है।
सोचने वाला इंसान उसको दवा की तरह समझता है,
तब वह ख़ुद को नुक्सान से बचा पायेगा।
यदि सच्ची बातों को अपनी 'बेइज्जती या अपमान' समझता है,
तो वहीं बातें उसके लिए फिर वह ज़हर बन जाएंगी या लगने लग जाएगी।
सच में वह ज़हर नही है।
पर सबसे ज्यादा नुक्सान उस नासमझ को ही होगा।🦚🦚