Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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आज शाम तुम्हें देखकर अब डरने लगी हूं मैं
पार्ट 2
समझ में आया क्यों लोग





अब समझा क्यों लोग
अक्सर ऐसा करता है

औरतो खुद ही अपने पांव में बेरियां लगाकर
चार दिवारीयों में बंद क्यों हो जाती है

वह जानबूझकर समाज के साथ-साथ
खुद के पंख क्यों कुतर देती है

आज समझ में आया
क्यों वह दौरना भगाना गुनगुनाना जीना
सीखना पढ़ना छोड़ देती है


वह सुरक्षित रहे सके
इसलिए
वह आजादी से हर रिश्ता तोड़ लेती है
लंबी राह देख कर मुंह मोड़ लेती है
और
खुला आसमान देखकर नजरे झुका


उन्हें बेरिया आजादी से क्या ज्यादा प्यारी है
हां समझ में आया
क्यों वो खुद को सुरक्षित रखने के लिए
आत्मा को मार देती है


उनकी निगाहों से आज मैं खुद को दिखा
मैं ठीक हूं ऐसी हुं
जैसी इस दुनिया की हर एक आम लड़की
जो अपनी ख्वाहिश जरूरत खुशी सब छोड़ देती है
खुद को बस सुरक्षित रखने के लिए


खुद को किसी और पर निर्भर कर देती है
वह जान बूझकर चुनाव करती है
जो उसे चार दिवारीयों में कैद कर देती है



यह सोचकर की चार दिवारीयों में
शायद उसे दरिंदे नहीं मिलेंगे

Hindi Poem by AbhiNisha : 112026175
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