रोशनी दिया से
गीत
रोशनी दिया से देखते हम थके हुए
दीया के लेए देख कर हमने रात गुजार दिए
वो रात जो कटी ना गई
वो रात जो सो कर बीताई ना गई
वो रात जो दर्द से भरा है
वो रात जिसमें चैन कहीं ना है
हमने उन्हें भी गुजारा है
बस एक रोशनी सी दीप कि लेए देखते हुए
वो रात जिसमे यादें हैं
वो रात जिसमे फरियाद है
वो रात जिसमें दर्दनाक खुआईसे हैं
हमने उन्हें गुजारा कैसे
हमसे जरा पूछो
अपनी आंखों को कैसे एक जोत दिया पे रख के संभाल अपने जज्बाते
हु। हु
रेहेम कर दे कर दे है रात मुझ पे
दिन गुजारी से गुजारा ना गया
रात हुई तो तन्हा खुद के दर्द सावरा ना गया
हम तो आंखें गड़ाए जोत दिया पे
ऐ आंखें वेहते गए यादों में पिया के
पिया के
हु। हु
उस थोड़ी सी रोशनी में
जो दिखा मुझे
वह मेरी आंसू थी आंखों
और झूठी आसा
सुबह होते सब ठीक हो जाएंगे
ऐसे किया खुद से वादा
वह वादा जो सूर्य उदय तक ही सच्चे थे
और झूठे थे नियंत्रण करती हूं मेरी परियासे
आज कई दिन बीत गए
अब भी वही हालाते हैं
अब भी वही बेचैनी
अब भी वही दर्द है
अब भी दर्द में आंखें भिकती हुई
वे दिया कि लेए बुझ गई
पर मिटी ना दिल की लगाई हुई झूठि आसे
वो रात रोशनी दिया कि लेए देखे थके हुए
थके हुए हम हैं कहीं किसी सफल के बीच डगर पर रुके हुए
रुके हुए
हां हां
रुके हुए
पर अभी सब खत्म हुआ भी नहीं
बस निगाहे जगी है
और जिसमें जवाब दे रही
सपना धुंदले हैं
पर आसे की डोर छुट्टी नहीं
यही जिंदगी है जज्बात है दबी हुई
पर उस दवाऊ में और गिला नहीं
नींद आती नहीं चैन से
हा ऐ रात निभाता कभी वफा भी नहीं
दिया कि लेए को देखकर
जागी मैं आज भी रात को
और आज अभी सुबह हुआ नहीं