कितने गिले हैं इन आंखों में
गीत
कितने गिले हैं इन आंखों में जरा पूछो
ऐ आंखें जो बेहती जा रही है
इन्हें जाकर रोको
ऐ आंखें जो बिन बातों की
बेहती जा रही है
अनकहे कुछ कहानी कहती जा रही है
इन्हें जरा सुनो
होंठ हैं खुले
मुस्कुरा नहीं रहे
इंतजार में तेरे
तेरे गम की नगमा गा रहे
आओ जरा पास आकर बैठो
घनी रात है
पर मौसम में साफ है
हवा चल रही चांद आसमान मैं दिख रही
बैठो पास मेरे
पलके उठा के
साथ में मेरे पूनम की चांदनी देखा
देखो यह चांद कितनी प्यारा है
इंतजार करते रहते हैं हम उनके
और यह आसमान में आकर दीदार अपने करा जाता है
शिकायत की मौका नहीं देती
हर बार यह वफा है निभाती है
एक तुम ही हो जो वादों से अपने मुकर है जाते
हां एक तुम ही हो जो वादों से अपने मुकर है जाते
पूछो जब वक्त कहां काटी तो बहाना बनाते
चांद को गौर से देखो
अगर यह कभी ना भी दिखे तो
इससे जरा तुम सवाल करके
देखो यह बता देते हैं
मौसम खराब था
या मेरा दीदार कोई और भी
तुम्हारे अलावा कर रहा था
कितने गिले इन आंखों में जरा पूछो
इस सांसों की दरमियां तुम भी जरा सुनो
सुनो ऐ बोहकती बेहकती सांसे क्या कहा रही
सुनो ऐ ठहरती ठहरती सांसे क्या कहा रही
सुनो ये मेहकती मेहकती है सांसे क्या कह रही
ऐ बस चाहती है तुम्हारी खुशबू जिसमें भर लूं
तुमने समा जाऊ
तुमको मैं अपना कर लूं
बस पास बैठो मेरे साथ बैठो
चांद को देखो
साथ मेरे हवाओं में सांस लो
बेहते आंखें आंखें तुम्हें देखें मुस्कुरा जाएंगे
तुम अगर इन धड़कनों को सुन लो तो
मेरी जान
शिकायत सारी ऐ धड़कन मिटा जायेंगे
खुल गई मैं
खुली किताब तेरे साथ जीना चाहती हूं मैं आज
तू अगर पास रहे दिल नाचे
दिल नाचे गाऐ तेरे प्यार में सो सो नगमे
कितने गिले इन आंखों में जरा पूछो
ऐ आंखें बेहती जा रही तेरे इंतजार में
हां करता तेरे इंतजार मैं
यह गीत आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहेंगे
मैं आपकी प्रिया लेखक अभिनिशा❤️🦋💯