Hindi Quote in Motivational by Vandna Sharma

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पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है

पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है। दर्द तो पुरुष को भी होता है। दिल तो उसका भी रोता है पर कहाँ कह पाता है अपना दुःख किसी से। हमारा समाज सदियों से पुरुष प्रधान रहा है। एक हाथ की सभी उंगलियां बराबर नहीं होती, उसी प्रकार सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते। कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, उसकी परवरिश और परिस्थितियां उसे अपराधी बना देती हैं। परवरिश का कितना महत्व है कि राक्षस कुल में भी प्रहलाद जैसे भक्त पैदा होते हैं।

समाज का ताना-बाना ही कुछ ऐसा है कि लड़कों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि तुम पुरुष हो तुम्हें रोना नहीं है। सारे कठिन कार्य पुरुषों के हिस्से आते हैं। परिवार के सभी दायित्वों का निर्वाह करना भी पुरुष की जिम्मेदारी होती है। एक औरत घर का काम करके सिर्फ घर में रहकर खुद को बेचारी नौकरानी समझती है क्योंकि सिर्फ अपने बारे में सोचती है। अरे उस आदमी का दर्द भी तो समझो जो चौबीस घंटे अपने बीवी बच्चों की खुशी के लिए, उनके सपने पूरे करने के लिए खुद को घिसता है। घर से बाहर निकलना पैसे कमाना इतना आसान कहाँ है। सुबह-सुबह जल्दबाजी में उल्टा-सीधा जो मिला खाकर घर से निकलता है ऑफिस पहुँचने की जल्दी, काम की चिंता। बास की डांट। कितना मानसिक दबाव रहता है दिमाग पर। घर से निकलो, दौड़ते-भागते मेट्रो पकड़ो, मेट्रो में भीड़ इतनी, खड़े-खड़े ऑफिस जाओ, पहुँचते ही बॉस की डांट खाओ।

कुछ फ्री में नहीं मिलता इस दुनिया में। हर चीज की कीमत अदा करनी होती है। प्राइवेट नौकरी वाले का तो बुरा हाल है। उन्हें तो मजदूर समझा जाता है। पूरा दिन गधे की तरह काम लो फिर गाली दो, जब चाहे नौकरी से निकाल दो। औरतें घर में रहकर शिकायत करती हैं कि ये लाकर नहीं दिया, ये नहीं किया घर को समय नहीं दिया। अरे घर से निकलकर देखो एक पुरुष की जिंदगी। अपने पास चाहे फटे जूते हों बीवी-बच्चों को नए जूते दिलवाता है। खुद सस्ते कपड़े पहनकर बीवी-बच्चों को महंगे कपड़े पहनाता है। खुद भूखे रहकर भी बच्चों का पेट पालने के लिए रात-दिन मेहनत करता है। जिस घर को बनाने में पूरी जिंदगी लगाता है, अपनी जवानी खर्च कर देता है, अपने शौक मारकर पाई-पाई बचाता है, उस घर में वो बेचारा कितनी देर, कहाँ रह पाता है। उस पुरुष के हिस्से में घर का अहाता ही आता है। घर के बाहर चारपाई पर पड़े सोचता होगा इस घर को बनाने में पूरी जवानी खत्म हो गई और बुढ़ापे में उसी घर से बाहर कर दिया जाता है। सच में पुरुष होना भी कितना कठिन होता है।

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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

Hindi Motivational by Vandna Sharma : 112029199
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