माँ… चोट तो आज भी वही लगती है
चोट लगी तो सबसे पहले तुम्हारा ही ख़याल आया, माँ।
याद आया, कैसे तुम घबराकर कहती थीं,
“अरे… इतनी ज़ोर से चोट लग गई?”
फिर बिना कुछ कहे
रसोई की ओर भाग जाती थीं।
हल्दी वाला दूध बनाती थीं,
गर्म पानी से सिकाई करती थीं,
और अपने प्यार भरे हाथों से
हर दर्द को धीरे-धीरे चुरा लेती थीं।
आज भी चोट लगी है, माँ…
फ़र्क बस इतना है कि
हल्दी वाला दूध मैं ख़ुद बना रही हूँ,
गर्म पानी की सिकाई भी ख़ुद ही कर रही हूँ।
लेकिन तुम्हारे हाथों का वो स्पर्श,
तुम्हारी दुआओँ की गर्माहट,
तुम्हारी घबराहट में छिपा प्यार—
वो कहीं नहीं मिलता।
दर्द तो शायद वक़्त के साथ कम हो जाए,
मगर तुम्हारी कमी…
हर चोट के साथ और गहरी हो जाती है।
काश, आज तुम मेरे पास होतीं, माँ।
तो शायद ये चोट इतनी नहीं चुभती।
अब हर ज़ख्म बस यही कहता है—
दवा तो मिल जाती है,
पर माँ का स्पर्श कभी नहीं मिलता।
तुम्हारी याद ही अब मेरी मरहम है, माँ…
और तुम्हारा एहसास ही
हर दर्द में मुझे संभाल लेता है।
🥹Miss u Ammi🥹💕love u alot💕
❤️sarwat Fatmi❤️