दिल चाहे उनसे मिलना
गीत
हु। हु हु। हु। हु। हु हु
दिल चाहे उनसे मिलना
मगर पांव थके है
डगर है उल्झा
पूरी उम्र बीताई मैं ने
याद उसे कर कर के
मांगते हुए दुआ
उसके ही लिए मैं ने
खुद की खुशियां कम कर दिया
हा। हा। हा। हा हा
हा हु हु हु हु
दिल चाहता है उनसे मिलना
मगर लगता है
अब तकदीर में नहीं है लिखा
मेरा तेरा सफर एक सा
लड़खराते कदम से चला आया
तुझे ढूंढते बेखबर होकर
कोई भी डगर से चला आया
मैं चला आया
हु
मेरे हमसफर मगर तुम मुझे ना मिला जिंदगी में कभी
आखिरी सफर तक मैं चला आया
तेरे ही राह बस एक देखती आई मैं पूरी उम्र
उम्र गुजरी मालो की तरह तेरे नाम जप जप कर
हु। हुं हु। हु
उम्र गुजारी मेलो की तरह तेरे नाम जप जप कर
जब भी दुआएं के लिए हाथ फैलाया
बस तेरे लिए दुआ किया
उन दुआओं में भी सांस जितनी मिली
उससे भी ज्यादा तेरे नाम जपता रहा
हां सांसों की डोर छूटे इस बात कि मुझे गम नहीं
सांसों की डोर से भी ज्यादा संभाले हैं
मैं तेरी यादें
इन सांसों से भी ज्यादा मैं तेरी नाम जपे
हा। हा। हा हा।
अब मुझे माफ कर मेरी मौला
थक गई मैं
मेरा तू इंसाफ कर मेरी मौला
अभी इंतजार नहीं होता
अब उम्र बीते विताई नहीं जा रही
ऐ मेरे दिल सीने में तड़प रहा है
सांसे मेरी ठहेर रही है
हु। हु आ
सासे भी ठहर रही है
और अब इन ठेहरी हुई सांसों को
और इंतजार की मोहलत अब लगता है नहीं है
नहीं है नहीं है
ए मेरी अल्लाह क्या वह कहीं नहीं है
या तो वह मेरे इंतजार के काबिल ही नहीं है
क्या मैं ने बेकार गुजार दी अपनी जिंदगी
ए खुदा बता मुझे
मैं भटक गई इन राहों पे
आंखें बंद मेरी ऐ जगह मुझे
हु
एक ख्वाब में खामोशी से उमर बीते है
अल्हड़ पुरवाई जैसे मैं बेहती बेहती रह गए
अब ख्वाबों में ही अटकी मैं रह गई
सांस खुद घुट रही
आंखों के सामने सब धुंदली पड़ रही है
फिर भी दिल जिंदा है एक आस पे
ए खुदा अब नहीं होता मुझसे और इंतजार। रे