मैं और मेरे अह्सास
जिंदगी
छोटी सी ये जिंदगी हँसकर गुजार दो l
दिलों दिमाग से सारा बोझ उतार दो ll
खुशियां सामने से नहीं आती लानी है l
हर दिन हर रात का लम्हा संवार दो ll
कहते नहीं पर कई जरूरतमंद होते है l
राह में चलते हुए किसीको पनाह दो ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह