“ उस जगह से लोग नफ़रत करते हैं
जहां उनसे जाया नहीं जाता
मुश्किल से लड़ना सिखा नहीं
कहने लगे नाविक आया नहीं
जरा देखो खुद की गलियों को
दूसरों को कहते हो बात में आनंद आया नहीं
क्या तेरी ये बात है
उस दिल को कह रहा है सही तूने बताया नहीं
मंजिलों से खुद डर गया
ओर कहता है किनारा आया नहीं
जब नदी ही पार नहीं की
तो कहता नाविक आया नहीं
( बात बहुत गहरी है जरा दिल से पढ़ना)