शीर्षक: सावन का शृंगार
हरी-हरी साड़ियाँ पहन कर सामने आओगी,
तुम साजन की दीवानी बन जाओगी।
होठों की लिपस्टिक, हाथों के कंगना जब चमकेंगे,
सावन की हरियाली धरती पर लाएँगे।
ओह! तेरा कंगना जब खनकेगा,
मेरा दिल चुराएगा।
तेरी माथे की बिंदिया दिल धड़काएगी,
मेरी नज़रों का चैन चुराएगी।
हाथों में मेहंदी, पाँव में पायल से सँवरोगी,
मेरे नयनों को तुम ख़ूब तड़पाओगी।
देखना सनम, मेरी नज़र न लग जाए तुमको,
मेरी याद तुम्हें भी तड़पाएगी।
साजन की तुम सावन का सवेरा बन जाओगी,
हाथों की हरी-हरी चूड़ियाँ जब खनकाओगी।
ज़ुल्फ़ों में जब तुम चमेली के फूल सजाओगी,
मेरे दिल में खुशबू बिखेर जाओगी।
ओह! तेरा कंगना मेरा दिल चुराएगा...
-एसटीडी मौर्य ✍️
7648959825