तेरे दिल से मैं यह पनाह माँगता हूँ,
दे जा मुझे मोहब्बत, यहीं गुनाह माँगता हूँ।
देख लूँ मैं जी भरकर और करूँ प्यार मैं तुझे,
सामने बैठे रहो मेरे यही दीदार-ए-महताब माँगता हूँ।
डूब जाऊँ इन आँखों में, हो जाऊँ गुम कहीं,
तेरी रोशन दो आँखों से, यहीं शराब माँगता हूँ।
कोमल सी पंखुड़ियाँ मेरे लबों पे आ गिरे,
तेरे सुर्ख होठों से, वो गुलाब माँगता हूँ।
थाम लो मेरा दामन और बन जाओ मेरे हमराज,
पढ़ी जाए दास्ताँ हमारी, वो किताब माँगता हूँ।
✍️बेनी सागर