जो कहते थे के जाएंगे न छोड़ के तुझे हर हाल में,
वही गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।
क्यों गए दूर इतने, क्या मुझसे ख़ता हो गई थी,
जाते-जाते बता जाते, क्या दूर होना ही एक सज़ा थी।
सुलगती जलती रातें मिला है मुझे उपहार में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।
बरसों से जो छुपा था, वो प्यार याद दिला गये,
छण भर की खुशियों के बाद हमें अब रुला गये।
ना जी सकूँ, न मर सकूँ, वो दर्द दिया है प्यार में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।
दबाये प्यार सीने में जी रहे थे तो सब ठीक था,
मिलकर बिछड़ने से तो न मिलते तो ही ठीक था।
अब आँसुओं के सहारे जिंदगी चली है राह में,
वहीं गए हैं छोड़कर मुझे बीच मंझधार में।
✍️बेनी सागर