कैलास निवासी....
ओ मेरे भोले भंडारी, मेरे कैलास निवासी ,
शून्य, मौन, एकांत वास में, मन हुआ अंतर्धान |
ब्रह्मांड के कण-कण में, अत्र-तत्र-सर्वत्र समाएं ,
सर्जन से विर्जन तक प्रभु तेरी ही महिमा गाएं ||
नमन तुम्हें है नृत्य रूप में, तांडव रूप तुम्हारा ,
विध्वंशक प्रलय के स्वामी, तुम गंगा धारा |
जन्म से श्मशान तक, तुम ही आदि अनंता ,
साधना से अगोरी तक प्रभु तुम ही एकांता ||
रूद्राक्ष और बेल पत्र से, सजती शिव आभा ,
लिंग रूप से शिवलिंग तक, फैली अद्भुत माया |
ओम कालेश्वर, महाकाल तुम पंचतत्व के स्वामी ,
अंतिम सत्य तुम हो केवल, हे पुण्यमय विधाता ||
तुमसे शरू , तुमसे खत्म है, यह सारा संसार ,
यही शाश्वत सत्य विश्व का, यही मुख्य प्राणनाथ |
बाकी सब मिथ्या है जग में, भ्रम का महा कलयुग ,
शिव चरणों में शिश झुकाकर, मुक्ति को है पाना ||
©®- शेखर खराड़ी
तिथि-१३/८/२०२६