Hindi Quote in Poem by Mannu Gujjar

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सत्ता के सौदागर”
सिंहासन पर बैठे नागों पर, जनता कब तक फूल चढ़ाए?
जो रक्षक थे इस धरती के, वे ही घर-घर आग लगाए।

वचन बेचते, धर्म बेचते, बेच रहे ईमान वतन का,
सोने की थाली में परोसें, विष हर भूखे निर्धन का।

माथे पर जनसेवा लिखकर, भीतर काला लोभ छिपाए,
हाथ जोड़कर वोट माँगते, फिर जनता को भूल ही जाएँ।

खेतों की हरियाली सूखी, महलों में उत्सव की रातें,
रोटी रोती चौखट-चौखट, हँसती रहती झूठी बातें।

ओ भारत के वीर जवानो!
कब तक यूँ अपमान सहोगे?

जिनकी नसों में स्वार्थ बहा हो,
क्या उनको भगवान कहोगे?

यह धरती राणा की धरती, यह चंद्रगुप्तों की जननी,
यहाँ नहीं बिकता मानव, यहाँ नहीं झुकती है धरणी।

जब-जब सत्ता अंधी होती, जनता बन जाती ज्वाला,
एक चिंगारी ही काफी है, जल जाए अन्याय का जाला।

उठो युवाओं! हुंकार भरो,
अब कलम बने रण का भाला,
सत्य-अग्नि से दग्ध करो तुम
हर भ्रष्टाचारी का जाला।
जिस दिन भूखा किसान उठेगा,
टूटेंगे सोने के सिंहासन,
जनता जब क्रोधित होती है,
डगमग होता हर शासन।

Hindi Poem by Mannu Gujjar : 112033239
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