परदेश में तीज कैसे मनाऊं
आ गई तीज सखी, कैसे मनाऊं
ना पड़े झूले अमीया की डाल पे
वो झूले, वो अमीया की डाल कहां से लाऊं
आ गई तीज सखी कैसे मनाऊं
मेरा मन फंसा है पीहर गलियों में
मैं यहां परदेस में, कैसे जाऊं
फर्ज हमेशा मुझको पुकारे
कैसे तीज मनाऊं
सावन देखो बरस रहा है
मायके जाने को मन तरस रहा है
राह निहारे मां मेरी,
पर मैं छोड़ पिया का आंगन
तीज मनाने कैसे जाऊं
रच गई मेहंदी हाथ सखी
नेह की पींगे कैसे क बढ़ाऊं
शहर में अकेले पड़ गई मैं तो
बिन सखियों के तीज कैसे मनाऊं
चूड़ी खनके, खनके पायलियां
बिजली कड़के, बरसे बदलियां
मन रोये याद कर पीहर की गलियां
ना है झूले, ना है सखियां
कैसे गीत मिलन के गाऊं
सखी कैसे तीज मनाऊं
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली