सपनों की उड़ान
इस सफर से उस सफर तक
रास्ते बदले, मंजिल बदली, बदल दी तकदीर,
बस कुछ ना बदला—इंतकाम सी संगसीर।
इंतकाम है अपने से, अपनी उन रुकावट से
जो बढ़ने ना दे आगे।
हर पल, हर लम्हा,
उड़ना है अब डटकर, झगड़ना है।
यह रुकावट कुछ नहीं है,
आगे किस्मत हमारे हाथ है।
सपनों की उड़ान, मन की मन का सम्मान,
देखो फिर एक नया मुकाम।
सपना डराए नहीं तो उसे बदल लो,
नई उमंग देखकर फिर डट लो,
क्योंकि जो सपना डराए वह तुम्हारे लिए...