Hindi Quote in Story by ANAMCARA

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प्रकृति और किसान

​टूटी उम्मीद और सूना आँगन

​"हम बारिश का इंतज़ार चाय और सुकून के लिए करते हैं, लेकिन एक किसान के लिए यही बारिश उसके पूरे साल के सपनों की डोर होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब वही उम्मीद टूटती है, तो एक भरा-पूरा आँगन कैसे सूना हो जाता है? आइए, आज उस किसान के संघर्ष को महसूस करते हैं, जिसकी दुनिया मिट्टी और मौसम के बीच कहीं खो गई।”

​वैसे तो आज कल लगभग सभी गाँव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे बुंदेलखंड का हाल एक अलग ही दर्द भरी कहानी कहता है। आषाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में जो पहली बारिश होती है, वह तपती धूप और पिघला देने वाली गर्मी से न सिर्फ राहत देती है, बल्कि यहाँ के किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण बन कर आती है।
​बड़े-बड़े शहरों में बारिश बस गर्मी से आजादी, कहीं अच्छी जगह घूमने या चाय के साथ गरमा-गरम भजिये की वजह बनती है, तो दूसरी तरफ किसानों के लिए उनके जीवन-यापन और सभी छोटे-बड़े सपने सच करने की उम्मीद।
​कैलाश काका बैठक में बैठे बाहर से आती बारिश की मन को छू लेने वाली आवाज़, साथ ही तेज़ सर-सर की करती हवा जो बैठक की खिड़की से कैलाश काका को छू कर जा रही थी और साथ ही काका के सपनों को उम्मीद दे रही थी। काका के चेहरे की झुर्रियां जैसे खुशमन के आगे कम हो गई थीं और आँखों में पोती की ब्याह और पोते को पढ़ाई के लिए बड़े शहर भेजने के सपने चमक रहे थे। वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में खनन (mining) के लिए बड़ी-बड़ी क्रशर मशीनें लगाई जा रही थीं।
​बारिश के थमते ही काका ने खेत में बुवाई शुरू कर दी। कैलाश काका ने बुवाई ही नहीं, खेत की ज़मीन में अपने सपने, मेहनत और एक-एक कर जमा की गई पूंजी भी बीज के साथ खेत में बो दी थी (शायद सभी किसान यही करते हैं)। इस उम्मीद में कि जब फसल कट कर घर के आँगन में आएगी तो न सिर्फ आँगन, बल्कि उनका जीवन भी खुशियों से भर जाएगा। साथ ही कैलाश काका को धीरे-धीरे चिंता सताने लगी थी क्रशर मशीन की खड़-खड़ करती आवाज़ के साथ सफ़ेद उड़ती हुई धूल, जो फसल, पेड़-पौधे, ज़मीन, पानी और साथ में लोगों के स्वास्थ्य पर भी सफ़ेद चादर बन कर बिछ रही थी, जो धीरे-धीरे सब को अपने आगोश में लेकर सब कुछ खत्म करने का काम कर रही थी।
​देखते ही देखते, क्वार (सितंबर-अक्टूबर) का महीना आ गया। बुंदेलखंड के किसानों और उनकी खरीफ की फसलों के लिए यह महीना किसी सांस रोक देने वाले इम्तिहान जैसा होता है। हर कोई बस यही दुआ करता है कि आसमान साफ़ रहे। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। क्वार की एक काली, भयानक रात अपने साथ बेहिसाब और तेज़ बेमौसम बारिश लेकर आई।
​उस बारिश के साथ कैलाश काका की फसल ही बर्बाद नहीं हुई, उनका सब कुछ बर्बाद हो गया—उनके सपने, मेहनत और जमा पूंजी भी (अक्सर किसानों के साथ ऐसा ही होता है)। पीछे छोड़ गया तो गिरता हुआ स्वास्थ्य, टूटे सपने और बैंक का कर्ज़ा, जो किसानों के लिए किसी बड़ी समस्या से कम नहीं होता, जिसको चुकाने के लिए किसान जाने क्या-क्या करते हैं।
​ऐसे ही बैंक के कर्ज़ को चुकाने और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए कैलाश काका के परिवार को बड़े शहर जाकर मज़दूरी करने के लिए जाना पड़ा। जिस आँगन में कैलाश काका हरी-भरी फसल रखने, पोती की बारात लाने के सपने देख रहे थे, अब वह आँगन हमेशा के लिए सूना हो गया था।
​एक एहसास
​खनन (mining), ये शब्द पढ़ने में बहुत छोटा है लेकिन असल में इसका मतलब बहुत बड़ा है—जो हरे-भरे पेड़-पौधों, जीवन और ज़मीन को बंजर बना देता है। ऐसे ही बेमौसम बारिश, जो किसानों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होती।
​कभी-कभी सोचती हूँ, हमने प्रकृति और किसानों के साथ कितना अन्याय किया है।
☆अनामकारा

Hindi Story by ANAMCARA : 112037466
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