मैं अलबेली
मैं अलबेली
रहती अकेली
कुछ न कुछ लिखती हूँ
मन की बात कहती हूँ
मेरी कलम है मेरी सहेली
ये दुनिया है एक पहेली
छोटी-छोटी खुशियाँ मेरी
छोटी सी है दुनिया मेरी
ये प्रकृति है मेरी साथी
चुपके से पढ़ लेती है
मेरे मन की पाती
किसे सुनाऊँ अपनी कहानी
सब हैं व्यस्त, मैं बेली
मैं अलबेली
रहती अकेली
नन्हीं चिड़िया तुम दूर देश को जाना
मेरी व्यथा सुनाना
क्या तुम भी
नहीं बनोगी मेरी सहेली
मैं अलबेली
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली