कुछ पल संजो कर रखे हैं
यादें समेटी छुपाई हैं,
उस चांदी के फ्रेम में
प्यार की परछाई है,
देखो वहां कोने में क्या है.?
अरे ये तो वो समय है
जो साथ बिताया था,
बचपन के टूटे खिलौने
वो भी तो इसमें रखे हैं,
छोटी सी फटी फ्रॉक
सितारे जिसमें जड़े हैं,
कितने जमा भविष्य के सपने
जो खुली आंखों से देखे थे,
अरे देखो वो बटुआ,
जिसमें बुआ के पैसे अब तक रखे हैं,
टॉफी के रैपर,झूठी आइस्क्रीम की डंडी
पापा की डांट,मम्मी का दुलार
ये रिबन,भाई ने चोटी खींची थी
कढ़ाई वाला रुमाल,दीदी ने आंसू पोंछे थे।
ये सूटकेस नहीं
यादों का पिटारा है
कोई मेरे दिल से पूछे
बचपन को जिसमें अब तक रखा
ये वो खजाना है।
धन्यवाद - शिल्पी गुप्ता 🙏 🙏 ✍️✍️