ढलता सूरज, थमी सी हवा,
समुंदर के किनारे यह तन्हा समां।
यह शाम दिल से एक सवाल करती है,
छुपी हुई यादों का ख्याल करती है।
लहरें आकर कदमों को छूती हैं,
आंखों में कई ख्वाहिशों की लड़ियां टूटती हैं।
धीरे-धीरे आसमान पर अंधेरा छाने लगा,
एक नया सन्नाटा दिल पर घर बनाने लगा।
शाम की यह सुर्खी अब रात में बदल जाएगी,
एक लंबी खामोशी हर तरफ सिमट जाएगी।
वक़्त के साथ सब कुछ बह जाता है यहां,
जैसे रेत पर लिखा नाम मिट जाता है यहां।