शायद इसलिए बनी थी नारी के लिए चारदीवारी
क्योंकि मालूम था बाहर बैठे हैं हवस के पुजारी।
हवस का शिकार बनती हैं जब कोई नारी
हालत सुनकर उसकी आ जाता हैं आंखों में पानी।
उसकी अस्मत को लूट कर, जिस्म को नोच कर ,
सड़क किनारे, नदी नालों में, पुल के नीचे
फेंकी गई बिना कपड़ो की लाश को देख कर ,
डरने लगी है आज हर नारी कल कहीं
आ ना जाए उसकी या उसकी बेटी की बारी।
शायद इसलिए होती थी पुराने जमाने में चारदीवारिया ,
जिनमें महफूज रहती थी मां बहन बीवी बेटियां।