संभाल कर थामना — प्रकृति का मौन सिद्धांत
प्रकृति कभी कसकर नहीं थामती,
फिर भी कुछ खोता नहीं।
मिट्टी जड़ों को सहारा देती है,
पर बाँधती नहीं—
वरना पौधा साँस लेना भूल जाता है।
पेड़ हवा से लड़ते नहीं,
झुकते हैं…
और इसी झुकने में उनका टिके रहना छुपा है।
नदी पानी को रोकती नहीं,
उसे बहने देती है—
क्योंकि ठहराव सड़न बन जाता है।
आसमान सब कुछ थामे रहता है,
बिना छुए, बिना अधिकार जताए।
यही सच्ची पकड़ है—
जहाँ अपनापन हो, पर कब्ज़ा नहीं।
जो सच में अपना होता है,
वो नरमी में ही सुरक्षित रहता है।
- Nensi Vithalani