Hindi Quote in Story by Raju kumar Chaudhary

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The Obedient Wifeआज्ञाकारी पत्नी
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक युवती रहती थी। उसकी शादी गाँव के सबसे अमीर जमींदार के बेटे अजय से हुई थी। अजय का स्वभाव सख्त था। वह घर का मुखिया था और मानता था कि पत्नी का काम सिर्फ़ आज्ञा मानना, घर संभालना और पति की सेवा करना है।
राधा बचपन से ही संस्कारों में पली थी। माँ ने उसे हमेशा कहा था — "बेटी, पति परमेश्वर होता है। उसकी बात टालना पाप है।" इसलिए राधा चुपचाप सब कुछ करती। सुबह उठकर रसोई, घर की सफाई, खेतों का हिसाब, मेहमानों की सेवा — सब कुछ बिना एक शिकायत के। अजय कभी तारीफ़ नहीं करता था, बस कहता, "यह तो पत्नी का फर्ज़ है।"
एक दिन अजय को शहर से कोई बड़ा काम आया। उसे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा। जाते समय उसने राधा को सख्त हिदायत दी:
"मैं जब तक वापस न आऊँ, तुम घर से बाहर नहीं निकलोगी। पड़ोस में भी नहीं जाना। जो भी सामान चाहिए, नौकर से मँगवा लेना। और हाँ, मेरी माँ की हर बात मानना।"
राधा ने सिर झुकाकर "जी" कहा।
अजय के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। सास रोज़ नई-नई बातें निकालतीं। कभी राधा को देर से उठने पर डाँटतीं, कभी खाने में नमक कम होने पर चिल्लातीं। राधा चुप रहती। लेकिन तीसरे दिन कुछ हुआ।
गाँव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। नदी उफान पर थी। रात को तेज़ बारिश हुई। सास बीमार पड़ गईं और दवा खत्म हो गई। नौकर शहर गया हुआ था। राधा ने देखा कि दवा के बिना सास की हालत बिगड़ रही है। बाहर जाना खतरनाक था, लेकिन सास की साँसें तेज़ हो रही थीं।
राधा ने एक पल सोचा। फिर उठी, चादर ओढ़ी और बारिश में निकल पड़ी। गाँव के आखिरी छोर पर डॉक्टर रहते थे। रास्ते में पानी घुटनों तक था। कई बार वह गिरती, लेकिन उठती और चलती रहती। आखिरकार डॉक्टर के पास पहुँची, दवा ली और वापस लौटी।
सुबह होते-होते सास की तबीयत संभल गई।
जब अजय एक हफ्ते बाद लौटा, तो घर में सब कुछ वैसा ही था — साफ़-सुथरा, शांत। लेकिन सास ने उसे सब बताया।
"यह लड़की आज्ञाकारी नहीं है," सास ने कहा। "मैंने मना किया था बाहर न जाने को, फिर भी चली गई।"
अजय गुस्से में राधा के पास गया।
"मैंने साफ़ मना किया था न?" उसने पूछा।
राधा ने शांत स्वर में कहा, "हाँ जी, आपने मना किया था। लेकिन सास जी की जान खतरे में थी। अगर मैं न जाती, तो शायद..."
अजय चुप हो गया। उसने पहली बार राधा की आँखों में देखा। उन आँखों में न डर था, न गुस्सा — सिर्फ़ एक गहरी समझ थी।
उस रात अजय ने राधा से कहा, "मैंने सोचा था आज्ञाकारी पत्नी मतलब चुपचाप सब सहने वाली होती है। लेकिन आज मुझे समझ आया... सच्ची आज्ञाकारी वह होती है जो परिवार की भलाई के लिए सही फैसला ले सके, चाहे नियम टूट जाएँ।"
राधा मुस्कुराई। "मैंने सिर्फ़ वही किया जो आपकी जगह पर आप करते।"
अगले दिन से घर में कुछ बदलाव आया। अजय ने राधा से सलाह लेना शुरू किया। सास भी अब उसकी इज्ज़त करने लगीं।
सीख: आज्ञाकारिता का मतलब अंधी आज्ञाकारिता नहीं होती। सच्ची आज्ञाकारिता में समझदारी, प्रेम और परिवार की भलाई छिपी होती है

Hindi Story by Raju kumar Chaudhary : 112015881
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