हिन्दू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
बचपन में थोड़ी बागी रही हर बात में तर्क ढूंढती
मैने दादी से पूछा ज़रा बताओ एक बात
नवरात्रि का व्रत क्यों है ख़ास
विद्रोही पोती की बात सुन दादी बोली
गणित में तू अव्व्ल तो बात दशमलव का आख़िरी अंक
मैंने कहा नौ,सतयुग के कितनेबसाल और उनका जोड़ मैने कहा नौ , कलियुग के कितने साल और उनका जोड़ मैने कहा नौ एक जान पनपे कोख में महीने लगे कितने मैने कहा नौ,माता के कितने रूप मैने कहा नौ
मैंने बोला इनमें से कौन सा रूप है ख़ास ,तो दादी बोली सुन मेरी बात- सती सी स्वाभिमानी , शैलपुत्री सी शिव दीवानी , ब्रह्मचारिणी के जैसा तप,चंद्रघंटा के जैसा हट , कूष्मांडा के जैसा जप, स्कंदमाता सी ममता , कात्यायनी सी प्रचंडता,निडर जैसे कालरात्रि,निर्मम जैसे महागौरी,कोमल जैसे सिद्धिदात्री