मैं और मेरे अह्सास
तुमसा नहीं देखा
दूर जरूर है पर ये ना समझना तुम पर नज़र नहीं l
तुम्हारी किसी भी हरकतों से बिल्कुल बेखबर नहीं ll
ज़माने भर में घूमकर देखा कोई तुमसा नहीं देखा l
दिलों जान लुटाई फ़िर भी तुम्हें कोई क़दर नहीं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह